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खुलासा: 2023 में 10वीं और 12वीं में 65 लाख से अधिक छात्र हुए फेल; एमपी, यूपी और बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब

Thu, 22 Aug 2024 07:59 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Board Exams: कक्षा 10 के लगभग 33.5 लाख छात्र अगली कक्षा में नहीं पहुंच रहे। जबकि 5.5 लाख उम्मीदवार उपस्थित नहीं हुए। 28 लाख असफल रहे। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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Report: देशभर में पिछले साल दसवीं और बारहवीं में 65 लाख छात्र फेल हो गए, जबकि राज्य बोर्डों में असफल छात्रों की संख्या अधिक दर्ज की गई। वहीं, दोनों कक्षाओं में ओपन स्कूल का प्रदर्शन खराब रहा।

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शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, 56 राज्य बोर्डों और तीन राष्ट्रीय बोर्डों सहित 59 स्कूल बोर्डों के कक्षा 10 और 12 के परिणामों के विश्लेषण से पता चला कि अधिक लड़कियां सरकारी प्रबंधन वाले स्कूलों से 12वीं कक्षा की परीक्षा में शामिल हुईं, लेकिन निजी स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में यह विपरीत है।

शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, कक्षा 10 के लगभग 33.5 लाख छात्र अगली कक्षा में नहीं पहुंच रहे। जबकि 5.5 लाख उम्मीदवार उपस्थित नहीं हुए। 28 लाख असफल रहे। यह उच्चतर माध्यमिक स्तर पर कम सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) का एक कारण है।
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इसी तरह, 12वीं कक्षा के लगभग 32.4 लाख छात्रों ने ग्रेड पूरा नहीं किया। जबकि 5.2 लाख उपस्थित नहीं हुए, 27.2 लाख असफल रहे।

कक्षा दस केंद्रीय बोर्ड में विफलता दर 6% जबकि राज्य बोर्डों में 16%

कक्षा 10 में, केंद्रीय बोर्ड में छात्रों की विफलता दर 6 प्रतिशत थी, जबकि राज्य बोर्डों में यह 16 प्रतिशत से कहीं अधिक थी। 12वीं कक्षा में, केंद्रीय बोर्ड में विफलता दर 12 प्रतिशत है जबकि राज्य बोर्ड में 18 प्रतिशत है।

फेल होने वाले छात्रों में सबसे अधिक मध्यप्रदेश, बिहार और यूपी बोर्ड के छात्र

दसवीं कक्षा में फेल होने वाले छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश बोर्ड में थी, उसके बाद बिहार और यूपी का स्थान था। जबकि 12वीं कक्षा में सबसे अधिक छात्रों के फेल होने की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश से और उसके बाद मध्य प्रदेश से हुई।
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सब जगह लड़कियों का रहा दबदबा

अधिकारी ने कहा, 2023 में छात्रों के समग्र प्रदर्शन में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट आई है। यह परीक्षा के लिए बड़े पाठ्यक्रम के कारण हो सकता है। सरकारी स्कूलों से कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा में लड़कों की तुलना में अधिक लड़कियां शामिल हुईं। हालांकि सरकारी, सहायता प्राप्त हो या निजी स्कूल हर जगह लड़कियों का दबदबा है और वह ज्यादा संख्या में उत्तीर्ण हुईं।
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