साथ ही हर बच्चे की सीखने-समझने की क्षमता के विपरीत एक मानक पाठ्यक्रम या स्टडी मटेरियल होता है, जिसे पढ़ना होता है। इन चुनौतियों से पार पाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अहम भूमिका निभा रहा है।
हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट और प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन के एक संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे 92 फीसदी नॉलेज वर्कर्स AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि दुनिया में यह आंकड़ा भारत से कम यानी 75 फीसदी ही है। भारत में AI के इस्तेमाल में अहम हिस्सेदारी शिक्षा क्षेत्र की भी है।
इस बारे में जानने के लिए हमने IIT के पूर्व छात्र और Khare.AI स्टार्टअप की शुरुआत करने वाले असीम खरे से बात की। उन्होंने बताया कि मौजूदा दौर में AI ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। यह उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को किफायती और सुलभ बना रहा है। व्यक्तिगत शिक्षण, हर दिन के अभ्यास, उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक और सेल्फ स्टडी की सुविधाओं के माध्यम से AI छात्रों की पढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस प्रकार, AI न केवल वर्तमान में, बल्कि भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सुधार की संभावनाओं को रेखांकित कर रहा है।
असीम खरे बताते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकें न केवल शिक्षा को ज्यादा आसान और असरदार बना रही हैं, बल्कि यह छात्रों की पढ़ाई के तरीके को भी बदल रही हैं। पर्सनल स्टडी, बच्चों के सवालों पर शिक्षकों की तरफ से तुरंत जवाब, सेल्फ स्टडी को प्रोत्साहन, समय प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच, भाषा अनुवाद और आपके प्रदर्शन के विश्लेषण जैसे कई पहलुओं में AI छात्रों की मदद कर रहा है।
हमने हमारी पहल के जरिए गणित की पढ़ाई को एक नए दौर में ले जाने की कोशिश की है। AI के जरिए शिक्षकों द्वारा छात्रों की गणित की बुनियाद को मजबूत किया जा रहा है। इससे गणित को समझने में बच्चों को मदद मिल रही है। उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है। इससे उन्हें प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता पाने में मदद मिल रही है।