1905 के ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन से की तुलना
मित्तल ने अमेरिका के इस कदम को "पाखंड और दबाव की राजनीति" करार दिया और घोषणा की कि यह प्रतिबंध देशभर में एक नई मुहिम ‘स्वदेशी 2.0’ की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देना है।
दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बोलते हुए मित्तल ने इस निर्णय को 1905 के ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन से जोड़ा, जब भारतीयों ने ब्रिटिश उत्पादों का बहिष्कार किया था। उन्होंने छात्रों और नागरिकों से भी आज उसी भावना को अपनाने की अपील की और कहा कि यह कदम अनुचित व्यापार नीतियों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध है।
शताब्दी पुराना आंदोलन, 21वीं सदी की कैंटीन तक
पहली नजर में यह कैंपस में सॉफ्ट ड्रिंक पर प्रतिबंध मात्र एक औपचारिकता लग सकता है, लेकिन मित्तल का 1905 का हवाला केवल भाषणबाजी नहीं है। यह छात्रों को याद दिलाने का एक तरीका है कि जैसे पहले स्वदेशी आंदोलन ने त्याग और आत्मनिर्भरता सिखाई थी।
पहले भी दी गई थी चेतावनी
राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी (आप) नेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल, जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के संस्थापक-कुलपति भी हैं, ने भारतीय वस्तुओं पर हाल ही में टैरिफ वृद्धि को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी थी।
डॉ. मित्तल ने घोषणा कहा था कि यदि अमेरिका द्वारा लगाई गई 50% टैरिफ वृद्धि 27 अगस्त तक वापस नहीं ली गई, तो कोका-कोला और पेप्सिको सहित सभी अमेरिकी पेय कंपनियों को एलपीयू के परिसर में प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके बाद, 28 अगस्त को उन्होंने प्रतिबंध लागू करने की घोषणा कर दी।