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स्पोर्ट्स में यहां हैं करियर के बेहतरीन अवसर, लाखों में होगी शुरुआती सैलरी

Sun, 30 Jun 2019 09:30 AM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग स्पोर्ट्स इवेंट्स में भारतीय खिलाड़ी बेहतर मुकाम पा रहे हैं। सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, कई खेलों में खिलाड़ियों को अपने पैशन को पूरा करने के मौके के साथ-साथ अच्छा पैसा और नाम भी मिल रह है। लेकिन हर कोई खिलाड़ी तो नहीं बन सकता। न ही खेल का दायरा सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित होता है। यहां अनेक अवसर हैं, जिनका ज्यादातर लोगों को पता नहीं है। अगर आपकी किसी खास खेल में रुचि है, तो जरूरी नहीं कि आप उसमें सिर्फ खिलाड़ी ही बन सकते हैं। खेलों के बड़े टूर्नामेंट्स आयोजित करने, उनका प्रबंधन करने में तमाम तरह के विशेषज्ञ काम करते हैं। तभी खेल के एक टूर्नामेंट का आयोजन सफल हो पाता है। फिर होनहार खिलाड़ियों के चोटिल होने के बाद उनकी रिकवरी के लिए भी टीम फिजिशियन, स्पोर्ट्स मेडिसिन फीजिशियन, स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट, डायटीशियन, स्पोर्ट्स थेरेपिस्ट की जरूरत होती है।

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स्पोर्ट्स में करियर बनाने के कई विकल्प हैं, जहां आपको अच्छे पैसे भी मिलेंगे और आप अपने जुनून को जी भी पायेंगे। तो आइये आज आपको बताते हैं स्पोर्ट्स के ऐसे ही कुछ करियर विकल्प, अहम संस्थान और अन्य जरूरी चीजों के बारे में...

स्पोर्ट्स में करियर की शुरुआत करने की सही उम्र

स्पोर्ट्स एक ऐसा क्षेत्र है जिसके लिए आप जितनी कम उम्र से शुरुआत कर दें, उतना बेहतर होता है। क्योंकि आपको खेल की समझ और अनुभव उतनी ही ज्यादा होती है। अलग-अलग स्पोर्ट्स एकेडमी अलग-अलग एज ग्रुप में स्टूडेंट्स को एडमिशन देती हैं, जैसे 5-8 वर्ष, 9-14 वर्ष और 15 वर्ष या उससे ऊपर। इस तरह शुरू से ही बच्चों की ग्रूमिंग एथलीट के तौर पर होती है। एडमिशन के समय ही एकेडमी में यह देखा जाता है कि स्टूडेंट में किस खेल की बेहतर क्षमता है और उसी के अनुसार उन्हें आगे प्रशिक्षण दिया जाता है। 
इतना ही नहीं, इन एकेडमीज या स्पोर्ट्स कॉलेज द्वारा स्टूडेंट्स को इंटर-सिटी व इंटर-स्टेट लेवल की प्रतियोगिताओं में भी भेजा जाता है।

कैसे चुनें सही एकेडमी

एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने के लिए सही एकेडमी का चुनाव बहुत जरूरी है। किसी भी खेल के लिए एकेडमी का चुनाव करते समय इन बातों का ध्यान जरूर रखें:

इंफ्रास्ट्रक्चर : एडमिशन लेने से पहले इस बात पर ध्यान जरूर दें कि आपके खेल से संबंधित उचित इंफ्रास्ट्रक्चर एकेडमी में हो और उसे समय-समय पर अपग्रेड भी किया जाता हो। एकेडमी में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना चाहिए।

कोच : आप कितने सफल होंगे, यह काफी हद तक आपके कोच पर निर्भर करेगा। कोच आपको गेम की सही टेक्निक और फिजिकल फिटनेस जैसी बातों को लेकर गाइड करता है और आपको आगे बढ़ाता है। 

सक्सेस रेट : ध्यान दें कि एकेडमी से कितने खिलाड़ी सफलतापूर्वक राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच पाए हैं। इसके लिए आप एकेडमी या स्पोर्ट्स कॉलेज का पिछला रिकॉर्ड चेक कर सकते हैं।

पढ़ाई के साथ सामंजस्य : यह सच है कि प्रोफेशनल बनने के लिए आपको प्रैक्टिस और अपनी फिजिकल फिटनेस का खयाल भी रखना पड़ता है। लेकिन इसके लिए पढ़ाई से समझौता करना समझदारी नहीं है।

खिलाड़ी बनने के अलावा ये भी हैं करियर विकल्प

आप स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, कोच या इंस्ट्रक्टर, कमेंटेटर या एंकर, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, स्पोर्ट्स मेडिसिन, इवेंट मैनेजमेंट, फैसिलिटी मैनेजमेंट में भी अपना करियर बना सकते हैं।

फिटनेस डाइरेक्टर : फिटनेस डाइरेक्टर वे प्रोफेशनल हैं जो व्यक्तिगत या सामूहिक तौर पर खिलाड़ियों की फिटनेस एक्टिविटी का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा फिटनेस डाइरेक्टर हेल्थ एजुकेशन जैसे कार्यक्रम का भी काम करते हैं।

कोच : स्कूलिंग से लेकर प्रोफेशनल स्पोर्ट्स तक कोचों की काफी मांग रहती है। हर स्तर के साथ अलग-अलग जिम्मेदारियां भी होती हैं। 
प्रोफेशनल खेलों में काफी प्रतिभाशाली कोचों की जरूरत होती है। एक अच्छा कोच बनने के लिए शुरुआत कॉलेज कोच और एथलीट से की जा सकती है। फिर धीरे-धीरे आप मुख्य कोच के स्तर तक पहुंच सकते हैं। 

हाई स्कूल और कॉलेज स्पोर्ट्स कोच :आजकल लगभग सभी कॉलेजों में कोच की जरूरत होती है। इसके लिए आपके पास कम से कम एक बैचलर डिग्री तो होनी ही चाहिए। इसके अलावा कॉलेज के स्पोर्ट्स कोच को एथलीट कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, फिजिकल एज्युकेशन या किसी अन्य खेल संबंधी क्षेत्र का अनुभव भी होना चाहिए। कॉलेज कोच के पास CPR (Cardio-Pulmonary Resuscitation) का सर्टिफिकेशन, प्राथमिक उपचार में सर्टिफिकेशन भी होना चाहिए।
आप NCAA (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) या NFL (नेशनल फुटबॉल लीग) कोच की अकादमी के लिए आवेदन कर सकते हैं जो एथलेटिक्स एजुकेशन और ट्रेनिंग में मदद करेगा।

स्पोर्ट्स मैनेजर : स्पोर्ट्स मैनेजर की जरूरत आजकल हर खेल को है। इसकी डिमांड तेजी से बढ़ भी रही है। इसमें आपको टीम के बिज़नेस मैटर्स देखने होते हैं। खिलाड़ियों से लेकर खेल का बजट, रेवेन्यू का भी ध्यान रखना होता है। इसके लिए आपको काफी ट्रैवल भी करना पड़ सकता है। लेकिन इसमें सैलरी काफी अच्छी मिलती है। अगर आपने अच्छी इंटर्नशिप्स कर इस उद्योग का बेहतर नॉलेज ले लिया तो आपकी शुरुआती सैलरी लाख रुपये प्रति माह भी हो सकती है।

स्पोर्ट्स एंकर और कमेंटेटर : स्पोर्ट्स एंकर की जरूरत हर खेल में होती है। खेल या इससे संबंधित किसी क्षेत्र में पत्रकारिता की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा खेल का अच्छा अनुभव भी हो तो बेहतर होगा।

रेडियो शो होस्ट : होस्ट को हर खेल के बारे में कम से कम सामान्य स्तर की जानकारी होनी चाहिए ताकि वो किसी भी खिलाड़ी से बात कर सके। अगर आप अच्छे तरीके से होस्ट करते है तो आपको खुद का शो भी शुरू करने का मौक़ा मिल सकता है जिसमें खिलाड़ियों और कोचों से इंटरव्यू लेने के अवसर मिलेंगे।
पत्रकारिता की डिग्री या डिप्लोमा, खेल की अच्छी जानकारी के साथ आपकी आवाज भी अच्छी होनी चाहिए।

स्पोर्ट्स राइटर : स्पोर्ट्स राइटर या खेल लेखक का काम होता है खेल से जुड़ी खबरें, ब्लॉग लिखना। एक तरह से ये पत्रकार ही होते हैं, जो डिजिटल मीडिया तथा अखबारों के लिए लिखते हैं। आज इस क्षेत्र में भी कई विकल्प मौजूद हैं। अच्छी खासी सैलरी भी मिलती है।
इसके लिए आपके पास पत्रकारिता की डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी है। स्पोर्ट्स में स्पेशियलाइजेशन हो तो और बेहतर। साथ ही आपको खेल की अच्छी जानकारी भी होनी चाहिए।

स्पोर्ट्स मेडिसिन और चिकित्सा : मेडिकल डॉक्टर खेल विभाग में अच्छी एथलेटिक इंजरी जैसे स्ट्रेन, स्प्रेन और फ्रैक्चर का ध्यान रखते है। इसमें एमडी को musculoskeletal system में अच्छी ट्रेनिंग लेनी जरूरी होती है। इसके अलावा ये डॉक्टर, स्थायी स्थिति का भी ध्यान रखते हैं और खिलाड़ियों को समय-समय पर जरूरी सलाह देते है।

एथलेटिक ट्रेनर : एथलेटिक ट्रेनर्स वैसे हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स होते हैं जो स्पोर्ट्स मेडिसिन टीम के साथ मिलकर मेडिकल की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके लिए बैचलर की डिग्री के बाद कम से कम दो साल का क्लीनिकल एक्सपीरियंस लेना बहुत जरूरी है और आप सर्टिफिकेशन के लिए Board of Certification (BOC) में आवेदन कर सकते हैं। 

इन सबके अलावा आप स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट, डेटा एनालिस्ट का करियर भी चुन सकते हैं। इन क्षेत्रों में भी बेहतर किया जा सकता है।

इन जगहों से ले सकते हैं प्रशिक्षण
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देश में विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण देने वाली ऐसी एकेडमीज हैं, जो स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एसएआई) के मापदंडों के अनुरूप चलाई जाती हैं। अगर आप खेल में करियर बनाना चाहते हैं, तो ऐसी ही किसी एकेडमी में प्रशिक्षण लेना बेहतर होगा। 
  • स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया
  • गवर्नमेंट स्पोर्ट्स कॉलेजेस
  • वीबी क्रिकेट एकेडमी, चेन्नई
  • नेशनल स्कूल ऑफ क्रिकेट, देहरादून
  • नेशनल क्रिकेट क्लब, कोलकाता
  • नेशनल क्रिकेट एकेडमी, बेंगलुरू
  • सेहवाग एकेडमी, दिल्ली
  • क्रिकेट इंडिया एकेडमी, मुंबई
  • कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट, बेंगलुरू
  • महाराजा रणजीत सिंह हॉकी एकेडमी, अमृतसर
  • नेशनल हॉकी एकेडमी, दिल्ली
  • प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन एकेडमी, बेंगलुरू
  • गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी, हैदराबाद
  • एमवी बिष्ट बैडमिंटन एकेडमी, दिल्ली
  • सुरजीत सिंह बैडमिंटन एकेडमी, दिल्ली
  • बाबू बनारसीदास यूपी बैडमिंटन एकेडमी, लखनऊ
  • सानिया मिर्जा टेनिस एकेडमी, हैदराबादम
  • हेश भूपति टेनिस एकेडमी
  • सीएलटीए टेनिस एकेडमी, चंडीगढ़
  • प्रीमियर इंडियन फुटबॉल एकेडमी, मुंबई
  • टाटा फुटबॉल एकेडमी, जमशेदपुर
  • ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन
  • बाइचुंग भूटिया फुटबॉल स्कूल्स
     
ये यूनिवर्सिटीज भी आएंगी आपके काम
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा
  • गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर
  • मनिपाल यूनिवर्सिटी, मनिपाल
  • डॉ. संजीब आचार्य, सीनियर कॅरिअर काउंसलर 
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