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Kerala VC Controversy: केरल हाईकोर्ट का फैसला, राज्यपाल के नोटिस का कुलपतियों को 7 नवंबर तक देना होगा जवाब

Fri, 04 Nov 2022 10:59 AM IST
सौरभ पांडे एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल हाईकोर्ट ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा कुलपतियों को भेजे गए कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का समय 7 नवंबर तक बढ़ा दिया है।
 
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केरल उच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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Kerala VC Controversy: केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा कुलपतियों (वीसी) को भेजे गए कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए समय 7 नवंबर तक बढ़ा दिया है। नोटिस में कुलपतियों से यह जानने की कोशिश की गई कि उन्हें अपने पदों पर बने रहने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए, क्योंकि उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार अवैध थी। बता दें कि यूजीसी के नियमों के विपरीत एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति (वीसी) की नियुक्ति को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के साथ, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने रविवार 24 अक्तूबर को राज्य में नौ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से इस्तीफे की मांग की थी। 

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वरिष्ठ अधिवक्ता जाजू बाबू हुए पेश
राज्यपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जाजू बाबू ने कहा कि न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने से परहेज करते हुए अपनी आपत्तियां पेश करने और व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध करने का समय दिया। निर्देश के साथ, अदालत ने कुलपतियों की याचिका को सूचीबद्ध किया, जिसमें दावा किया गया था कि राज्यपाल का नोटिस 8 नवंबर को सुनवाई के लिए अवैध और शून्य था । इससे पहले, राज्यपाल ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राजभवन ने कुलपतियों को सूचित कर दिया है। उनके स्पष्टीकरण और व्यक्तिगत सुनवाई के लिए अनुरोध करने का समय 7 नवंबर तक बढ़ा दिया गया है।

दो विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने दिया है जवाब
आरिफ मोहम्मद खान ने विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में राज्य के 11 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें तीन और चार नवंबर तक का समय दिया था। राजभवन के सूत्रों ने बताया कि अभी तक केरल यूनिवर्सिटी और केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज (KUFOS) के वीसी के जवाब ही मिले हैं।

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इन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से इस्तीफे की मांग
केरल विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज, कन्नूर यूनिवर्सिटी, श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ संस्कृत, यूनिवर्सिटी ऑफ कालीकट और थुंचथ एजुथाचन मलयालम यूनिवर्सिटी के वीसी ने चांसलर के आदेश को अदालत में चुनौती दी थी।
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