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जेएनयू मामले में अब केंद्र सरकार नहीं देगी दखल

Thu, 28 Nov 2019 09:14 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया सीमा शर्मा, नई दिल्ली

सार

  • विश्वविद्यालय को बताया स्वायत्त संस्था
  • प्रशासन को छात्रों व हितधारकों के साथ मिलकर दिक्कतें दूर करने की दी सलाह
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी को लेकर चल रहे आंदोलन में अब केंद्र सरकार कोई दखल नहीं देगी। जेएनयू ही नहीं सरकार ने अब किसी भी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्णय लिया है।

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सरकार का मानना है कि विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्था है और वहां के प्रशासन को अपनी दिक्कतों का समाधान छात्रों व हितधारकों के साथ मिलकर खुद करना चाहिए।

केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जेएनयू मामले की रिपोर्ट में सामने आया है कि छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद नहीं हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामी के चलते छात्रों का गुस्सा सड़कों तक पहुंचा। इसलिए छात्रों की बात सुनने और दिक्कत समझने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करनी पड़ी। समिति ने पाया कि कुलपति या विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से बात करता तो वे कैंपस से निकलकर सड़कों पर आंदोलन नहीं करते। समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी माना है कि विश्वविद्यालय की फीस में एक साथ अत्यधिक बढ़ोतरी की गई है।

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जेएनयू ने अपनी समिति बनाकर खुद संशोधित हॉस्टल मैनुअल बनाया

सरकार विश्वविद्यालयों के किसी प्रशासनिक मामलों में दखल नहीं देना चाहता है। सरकार की इसी रणनीति व फैसले के चलते जेएनयू प्रशासन ने अपनी समिति बनाकर संशोधित हॉस्टल मैनुअल बनाया और फीस में बड़ी कटौती की।

प्रशासनिक प्रणाली को सुचारु बनाने में गवर्नेंस सक्षम

किसी भी विश्वविद्यालय में प्रशासनिक प्रणाली को सुचारू बनाने और चलाने में गवर्नेंस सक्षम होता है। इसमें छात्र व हितधारकों के अलावा गवर्निंग बॉडी, एग्जीक्यूटिव, एकेडमिक काउंसिल समेत शिक्षक संघ भी शामिल होता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या फिर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का काम नीतिगत फैसले लेना होता है। जबकि कोर्स, फीस, नई योजनाओं का काम प्रशासनिक होता है। स्वायत्त संस्थाओं में बाहरी दखल नहीं हो सकता।

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