जेएनयू : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली
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देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं बेहतरीन उच्च शिक्षण संस्थानों में शुमार राष्ट्री राजधानी स्थित जेएनयू यानी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अब एक नए आयाम को स्थापित करने की दिशा में शुरुआत करने जा रहा है। मानविकी और विज्ञान में विशेष पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाली जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान में विविध पाठ्यक्रमों की शुरुआत पर विचार कर रहा है।
विश्वविद्यालय की शीर्ष शैक्षणिक परिषद यानी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में मंगलवार को रखे जाने वाले एक आधिकारिक दस्तावेज में यूनिवर्सिटी कैंपस एक मेडिकल कॉलेज और 500 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाने का प्रस्ताव है।
इसमें कार्डियोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरोलॉजी और पल्मोनोलॉजी में महत्वपूर्ण सेवाओं सहित सुपर स्पेशियलिटी उपचार की पेशकश की जा सकती है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों के लिए आरक्षित 50 फीसदी संकाय पदों के साथ एक गैर-पारंपरिक विभाग यानी नॉन ट्रेडीशनल डिपार्टमेंट भी शुरू किया जाना है। इस परियोजना की लागत 900 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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जेएनयू अधिनियम 1966 और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार तैयार प्रस्ताव में प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों एम्स और निमहंस के सदस्य शामिल हैं। विश्वविद्यालय अपने परिसर में उपलब्ध 25 एकड़ भूमि पर स्कूल और अस्पताल स्थापित करने का प्रस्ताव करता है और सभी विषयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रदान करेगा।
प्रस्ताव में कहा गया है कि एमबीबीएस और एमडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के माध्यम से किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, इस योजना में 259 संकाय सदस्यों को काम पर रखना शामिल है और परियोजना का कुल अनुमानित बजट 900 करोड़ रुपये है। एकेडमिक काउंसिल की ओर से एक बार मंजूरी मिलने के बाद, परियोजना को आगामी तीन साल में पूरा कर लिया जाने का प्रस्ताव है।