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JNU CUCET: जेएनयू एकेडमिक काउंसिल की बैठक, विरोध के बीच सीयूसीईटी पर लग सकती है मुहर

Wed, 12 Jan 2022 01:51 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CUCET for Admissions in Jawaharlal Nehru University:  जेएनयू एकेडमिक काउंसिल की बैठक में केंद्रीय विश्वविद्यालय सामान्य प्रवेश परीक्षा यानी सीयूसीईटी (CUCET) के कार्यान्वयन के तौर-तरीकों पर चर्चा होगी। हालांकि, जेएनयू छात्र संघ सीयूसीईटी लागू करने के विरोध में है। 
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जेएनयू : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार भी जेएनयू प्रशासन को छात्र-छात्राओं के समूह विशेष के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इस बार मामला अकादमिक परिषद की बैठक को लेकर है। बुधवार, 12 जनवरी, 2022 को होने वाली इस बैठक में जेएनयू की दाखिला प्रक्रिया को बदलने पर मुहर लग सकती है।

CUCET के कार्यान्वयन के तौर-तरीकों पर होगी चर्चा

माना जा रहा है कि जेएनयू एकेडमिक काउंसिल की बैठक में केंद्रीय विश्वविद्यालय सामान्य प्रवेश परीक्षा यानी सीयूसीईटी (CUCET) के कार्यान्वयन के तौर-तरीकों पर चर्चा होगी। हालांकि, जेएनयू छात्र संघ सीयूसीईटी लागू करने के विरोध में है। एजेंसी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अकादमिक परिषद की इस बैठक में विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार सीयूसीईटी के कार्यान्वयन पर विचार करेगा।

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शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी के विस्तृत दिशा-निर्देशों का इंतजार

हालांकि, विश्वविद्यालय ने पहले ही एकेडमिक काउंसिल की बैठक में सीयूसीईटी के लिए जाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन इसे कब से और किस प्रकार से लागू किया जाएगा, इस संबंध में निर्णय नहीं हो पाया था। अब इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी के विस्तृत दिशा-निर्देशों का इंतजार है। जेएनयू की प्रवेश परीक्षा वर्तमान में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी- एनटीए द्वारा आयोजित की जाती है। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी अपने अगले शैक्षणिक सत्र से CUCET को लागू करने के निर्णय की घोषणा कर चुकी है। 

जेएनयू छात्र संघ का आरोप- हो रही परिपाटी बदलने की कोशिश

वहीं, जेएनयू छात्र संघ ने सीयूसीईटी अपनाने पर हो रही चर्चा की आलोचना की है। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि कुलपति कोरोना महामारी के दौरान अकादमिक परिषद की बैठकों के जरिये निर्णय लेने की प्रक्रिया द्वारा विश्वविद्यालय की परिपाटी बदलने का प्रयास कर रहे हैं। घोष ने आरोप लगाया कि जेएनयू के कुलपति ने बिना किसी विचार-विमर्श और छात्रों के साथ चर्चा किए बिना सीयूसीईटी लागू करने के लिए कोविड-19 महामारी के दौर में अकादमिक परिषद की बैठक बुलाई है।
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जेएनयूएसयू के प्रतिनिधियों को नहीं बुलाया गया, प्रोफेसर भी मौन

जेएनयू छात्र संघ ने आरोप लगाए कि इस बार भी जेएनयूएसयू के प्रतिनिधियों को अकादमिक परिषद की बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है और यहां तक कि अगर प्रोफेसरों के पास एकेडमिक काउंसिल बैठक में मतदान का अधिकार है और वे असहमत हैं तब भी हम जानते हैं कि वे क्यों मौन हैं। कुलपति ऐसे कदमों के माध्यम से एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय के तौर पर जेएनयू की प्रकृति को बदलना चाहते हैं।
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