उम्मीदवारों के लिए इसरो के पांच केंद्रों - विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम, यूआर राव उपग्रह केंद्र, बेंगलुरु, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद और उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, शिलांग में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसरो के एक बयान के अनुसार इस कार्यक्रम में क्लास लेक्चर, प्रैक्टिकल एक्टीविटी, प्रख्यात वैज्ञानिकों के साथ बातचीत, लैबोरेट्री/ फैसिलिटी सेंटर का दौरा, अंतरिक्ष को देखना, रोबोटिक असेंबली और 'कैनसैट' प्रयोग आदि शामिल हैं।
इसरो ने बताया कि युविका, स्कूली बच्चों के लिए एक विशेष कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने वाले युवा छात्रों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और स्पेस एप्लीकेशन पर बुनियादी ज्ञान प्रदान करना है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उभरते रुझानों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। इसरो ने कहा कि उसने "कैच द यंग" के लिए इस कार्यक्रम को चाक-चौबंद किया है, यह भी उम्मीद है कि अधिक छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) आधारित अनुसंधान / करिअर को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
सभी छात्रों को इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ के साथ यात्रा और आमने-सामने बातचीत के लिए भारत के अंतरिक्ष बंदरगाह एसडीएससी एसएचएआर-श्रीहरिकोटा ले जाया जाएगा। सोमवार को 'युव विज्ञान कार्यक्रम' (Yuvika) का उद्घाटन सत्र को वर्चुअली संबोधित करते हुए इसरो प्रमुख सोमनाथ ने छात्रों से आग्रह किया कि वे वरिष्ठ वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों के साथ इस समय और अवसर का पूरा उपयोग करें, जिनसे वे अगले दो सप्ताह में मिलने जा रहे हैं। उन्होंने छात्रों को इंजीनियरिंग, एस्ट्रोफिजिक्स, एस्ट्रोबायोलॉजी, गणित, सामग्री विज्ञान, रसायन विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे विशाल अवसरों और डोमेन के बारे में भी समझाया जो वास्तव में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का अभिन्न अंग हैं, लेकिन लोगों को इस बारे में पता नहीं है।