लॉकडाउन के चलते मोबाइल और लैपटॉप पर हो रही ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने से परेशान अभिभावकों की चिंता का सरकार ने निदान कर दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मंगलवार को ‘प्रज्ञता’ गाइडलाइन जारी की। इसके तहत प्री-प्राइमरी के बच्चों के लिए रोज 30 मिनट और 1 से 12वीं तक के बच्चों के लिए 30 से 45 मिनट के अधिकतम चार सत्रों की समय सीमा तय की गई है। स्कूलों को इन निर्देशों के आधार पर ही ऑनलाइन पढ़ाई करानी होगी।
आठ बिंदुओं पर बनी गाइडलाइन
मंत्रालय ने आठ बिंदुओं पर गाइडलाइन तैयार की है। ये हैं योजना, समीक्षा, व्यवस्था, मार्गदर्शन, वार्ता, कार्य, निगरानी और सराहना।
बच्चों की सेहत का रखा ध्यान : निशंक
छात्रों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन से लेकर अभिभावकों की दिक्कतों को ध्यान में रखकर गाइडलाइन बनाई गई है। इससे ऑनलाइन पढ़ाई सुरक्षित और सुचारू रहेगी। बच्चों के मूल्यांकन की जरूरत, पढाई अवधि, ऑनलाइन संतुलन, ऑफलाइन गतिविधि आदि को लेकर चिंताओं का समाधान किया गया है। शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हर आयाम को ध्यान में रखा गया है। साइबर सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है।
- रमेश पोखरियाल निशंक, मानव संसाधन विकास मंत्री
अभिभावकों की थी ये चिंता
अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता थी कि बच्चों को स्कूल की तरह सभी पीरियड ऑनलाइन पढ़ाए जा रहे हैं। इससे उनका मोबाइल और लैपटॉप के साथ स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। इसके चलते नजर कमजोर होने समेत कई शारीरिक मुश्किलों का खतरा बढ़ने की आशंका थी।