डॉ. डे ने सबसे पहले आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह भारतेन्दु हरिश्चंद्र को याद किया जिन्होंने, निज यानी अपनी भाषा को सारी उन्नतियों का मूलाधार बताया है। इसके बाद उन्होंने हिंदी में काम करने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि यदि आप अंग्रेजी में ‘Approved’ लिखते हैं तो आप 8 अक्षरों का और 'Recommended' में 11 अक्षरों का प्रयोग करते हैं। उसके स्थान पर यदि आप हिन्दी का प्रयोग करते हैं तो आप क्रमशः स्वीकृत और अनुशंसित लिखते हैं।
इसी तरह, आप ‘Skilled’, ‘Semi-skilled’ और ‘Unskilled’ को क्रमशः कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल के रूप में उपयोग कर सकते हैं। ऐसा करने से न सिर्फ आप कम अक्षरों का इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि सबसे खास बात यह है कि ये शब्द बांग्ला भाषा के काफी करीब हैं। उन्होंने कहा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप राजभाषा का उपयोग कर रहे हैं जो कि सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कर्तव्य भी है। अंत में उन्होंने सभी को हिंदी में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक बांप्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के निदेशक डॉ. देबी प्रसाद मिश्रा रहे। उन्होंने इस तरह के सार्थक कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्थान को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने यह भी बताया कि विज्ञान और प्रशिक्षण में हिंदी का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
इस दौरान हिंदी की दशा और दिशा पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। बैठक में संस्थान के सभी वैज्ञानिकों, अधिकारियों और परियोजना कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन समिति सदस्य डॉ. एस.के. मंडल ने किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से ‘हिन्दी पखवाड़ा’ समारोह का शुभारंभ भी किया गया। 28 सितंबर तक विविध प्रतियोगिताओं के द्वारा हिन्दी में रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. पी.पी. पाल, प्रधान वैज्ञानिक ने सबका धन्यवाद किया।