मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने अपने हालिया फैसले में कहा, "हम यह समझने में असफल हैं कि अगर फेडरेशन ने अपीलकर्ता से एक सुपाठ्य प्रमाणपत्र को वेब-होस्ट करने के लिए कहा होता तो क्या आसमान टूट पड़ता।"
यह है पूरा मामला
केएमएफ ने देवराज पीआर द्वारा अपलोड किए गए प्रमाण पत्र को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि यह पढ़ने योग्य नहीं था और उसे सामान्य श्रेणी में भेज दिया था, जबकि वह आरक्षित श्रेणी के तहत नौकरी मांग रहा था। उन्होंने एकल न्यायाधीश पीठ से संपर्क किया था, जिसने 14 फरवरी, 2023 को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। फिर उन्होंने एक अपील दायर की जिसे डिवीजन बेंच ने अनुमति दे दी थी। पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 12 के अनुसार केएमएफ एक राज्य इकाई है और उसे अपने व्यवहार में निष्पक्ष होना चाहिए।