सरकारी आंकड़ा बताता है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भारत से दूसरे देशों में जाने वाले छात्रों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। या यूं कहें कि छात्रों की विदेशी शिक्षा पद्धति ज्यादा आकर्षित कर रही है। आज का युवा अपने भविष्य को लेकर ज्यादा सचेत है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 13 लाख से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए विदेशों के शैक्षणिक संस्थान में अध्ययन कर रहे हैं।
राज्य सभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने विदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहे भारतीय छात्रों के आंकड़े प्रस्तुत किए। इन आंकड़ों के मुताबिक हर साल विदेश में शिक्षा प्राप्त करने जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार 13,35,878 भारतीय विदेशों में जाकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि छात्रों की संख्या हर साल बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 13,18,955 छात्र विदेशों में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। जबकि 2022 में यह संख्या 9,07,404 थी।
विदेशों में पढ़ रहे छात्रों का विस्तृत डाटा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान सत्र में सबसे ज्यादा छात्रों ने कनाडा के कॉलेजों में प्रवेश लिया है। वर्तमान में विदेश में पढ़ रहे 13,18,955 छात्रों में से सिर्फ 4,27,000 छात्र कनाडा में पढ़ हैं। वहीं 3,37,630 छात्र संयुक्त राज्य अमेरिका में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं चीन में भारत के 8,580, ग्रीस में 8, इस्राइल में 900, पाकिस्तान में 14, यूक्रेन में 2510 भारतीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे।
बता दें कि राज्यसभा के दौरान विदेश मंत्री से पूछा गया था कि क्या सरकार विदेश पढ़ने जा रहे विद्यार्थियों का डाटा अपने पास रखती है? इस पर मंत्री नें आंकड़ों के साथ जवाब दिया।
वीजा मुक्त प्रवेश यात्रा के लिए किए जा रहे प्रयास
विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार उन देशों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां भारतीयों की वीजा मुक्त प्रवेश यात्रा हो सके। आगमन पर वीजा की सुविधा प्रदान की जा सके।
वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार केंद्रीय मंत्री का कहना है कि विदेश में भारतीय मिशन लगातार विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के साथ जुड़े रहते हैं। उनके साथ ग्लोबल रिश्ता पोर्टल पर पंजीकरण करा कर जुड़े रहे हैं। साथ ही पहली बार विदेश यात्रा कर रहे भारतीय छात्रों के लिए स्वागत समारोह आयोजित करते हैं। उन्हें मेजबान देशों में सुरक्षा मुद्दों पर जानकारी देते हैं।