देश में 40,000 डॉक्टरों की कमी, कोरोना की तीसरी लहर से निपटना मुश्किल
उन्होंने दावा किया कि देश में 40,000 डॉक्टरों की कमी है। उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों की कमी के कारण COVID-19 की तीसरी लहर से निपटना मुश्किल है। इसलिए, वे आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) और सभी वैकल्पिक सेवाओं का बहिष्कार कर प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि सरकारें समय पर फैसला लें।
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को देश भर से मिल रहा समर्थन
फोर्डा के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे जूनियर और रेजिडेंट डाॅक्टरों की हड़ताल को देश भर से समर्थन मिल रहा है। नीट पीजी काउंसलिंग में हो रही देरी के विरोध में भाग लेते देशभर में मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सभी गैर-आपातकालीन सेवाओं का कार्य बहिष्कार किया। इधर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, चंडीगढ़, झारंखड समेत कई राज्यों से पूरा समर्थन मिल रहा है। सभी स्थानों पर हड़ताल का व्यापक असर देखने काे मिल रहा है।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण की सीमा पर होना है पुनर्विचार
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में नीट पीजी प्रवेश परीक्षा में ईडब्ल्यूएस आरक्षण कोटा के तहत आय सीमा को लेकर सुनवाई लंबित है। इस कारण, केंद्र सरकार ने नीट पीजी काउंसलिंग को स्थगित कर दिया है। सरकार ने कहा था कि उसका पैनल चार सप्ताह में EWS श्रेणी के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा के मानदंड की समीक्षा करेगा। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 06 जनवरी, 2022 के लिए निर्धारित है और तब तक नीट पीजी की काउसंलिंग शुरू होने के आसार बेहद कम है।
जेएनएमसीएच एएमयू ने भी दिया डॉक्टरों की हड़ताल को समर्थन
जेएनएमसीएच एएमयू ने नीट पीजी 2021 काउंसलिंग में देरी का विरोध कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों को पूरा समर्थन दिया है। जेएनएमसीएच ने मांगें पूरी होने तक 06/12/21 की शाम 07 बजे से आपातकालीन सेवाओं को वापस लेने का फैसला किया है।