शिकायतकर्ता तृषा रानी भट्टाचार्य ने ऐसे व्यक्ति को भूमि हड़पने वाला और अतिक्रमण करने वाला कहकर मौखिक रूप से दुर्व्यवहार करने पर आपत्ति जताई और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की। भट्टाचार्य ने बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन थाने के प्रभारी को लिखे पत्र में कुलपति के अलावा डिप्टी रजिस्ट्रार अशोक महतो और विश्वविद्यालय के प्रवक्ता महुआ बंद्योपाध्याय पर भी आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने पत्र में कहा कि मुझे डर है कि 90 वर्षीय अमर्त्य सेन पर जमीन हड़पने के आरोप से उनके जीवन पर बड़ा संकट आ सकता है, क्योंकि उन्हें तकलीफ होगी।
शांतिनिकेतन थाने के एक अधिकारी ने मंगलवार शाम को शिकायत मिलने की पुष्टि की है। विश्वविद्यालय ने अर्थशास्त्री पर अपने परिसर में अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। केंद्रीय विश्वविद्यालय ने सेन को 19 अप्रैल को अंतिम आदेश के प्रकाशन के 15 दिनों के भीतर यानी छह मई तक कथित रूप से कब्जाई भूमि को खाली करने के लिए कहा।
नोटिस में कहा गया है कि सरकार की सलाह और कैग की रिपोर्ट के अनुसार, सदियों पुरानी संस्था को अतिक्रमण की गई जमीन से उन्हें बेदखल कर वापस लेनी हैं। यह तय किया गया है कि अनुसूचित परिसर के उत्तर-पश्चिम कोने में 50 फीट गुणा 111 फीट के आयाम वाली करीब 1.25 एकड़ वापस ली जानी है।