डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन को देखते हुए लिया निर्णय
मंत्रालय की चिट्ठी में कहा गया है कि आजकल यूपीआई, मोबाइल वॉलेट और नेट बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में डिजिटल भुगतान से लोगों को सुविधा मिलेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावक बिना स्कूल गए घर बैठे ही भुगतान कर सकेंगे।
मंत्रालय ने कहा कि इससे सभी लोग वित्तीय रूप से अधिक जागरूक बनेंगे और डिजिटल लेनदेन की दुनिया को बेहतर समझ पाएंगे। यह कदम “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने में मदद करेगा, जिसमें शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल, समावेशी और नागरिक केंद्रित बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार पहले ही लोगों के जीवन और शिक्षा को आसान बनाने के लिए कई नीतिगत और कानूनी सुधार कर चुकी है। अब स्कूलों में डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ना इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो देश के डिजिटल परिवर्तन के लक्ष्य से जुड़ा है।