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Amar Ujala Samvad: 10 साल बाद कैसी होगी भारत की तस्वीर, संवाद के मंच पर डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने बताया

Tue, 03 Sep 2024 04:56 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Amar Ujala Samvad: अमर उजाला संवाद में आज राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) के अध्यक्ष डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक की भूमिका पर बात की। उन्होंने बताता कि कैसे तकनीक की मदद से आज हमारी पहुंच दूर-दूराज के इलाकों तक भी पहुंच गई है। इसके साथ ही उन्होंने विदेशी शिक्षा प्रणाली और भारतीय शिक्षा प्रणाली पर भी बात की।
 
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अमर उजाला संवाद में एनईटीएफ अध्यक्ष डॉ अनिल सहस्रबुद्धे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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Amar Ujala Samvad: अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन यहां राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) के अध्यक्ष डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे भी पहुंच रहे हैं। संवाद में रोशन राहें नामक सत्र में डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे से खास बातचीत के दौरान शिक्षा और तकनीक पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण भमिका निभा रही है। इसकी मदद से आज दूर-दराज के इलाकों तक भी पहुंच है।

विदेशी शिक्षण संस्थानों को लेकर कही ये बात

लोगों में विदेशी विश्वविद्यालयों की डिग्री पाने का क्रेज है। विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस भारत में खुल रहे हैं। भारत में ऐसे विवि आएंगे तो दो लाभ होंगे। पहला कि भारत में ही विदेशी विवि की डिग्री मिलेगी। दूसरा विदेशी मुद्रा विनिमय कम होगा। भारत के विवि को भी विदेशों में जाना चाहिए।

तकनीक पर बात

हमनें तकनीक का विकास नहीं किया। अगर हम शुरूआत से ही प्रोडक्ट बनाने पर ध्यान देते तो आज तस्वीर कुछ और होती। आने वाले दस साल में बहुत सारे प्रोडक्ट ऐसे होंगे जो भारत से बाहर जाएंगे।

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हायर एजुकेशन की हालत पर ये बोले

विवि के हालात को लेकर डॉ. अनिल ने कहा कि छात्रों के साथ धोखा-धड़ी रोकने के लिए 2015 में एनआईआरएफ शुरू किया गया। इसमें हर विवि की रैकिंग की जाती है। इस बार 13 श्रेणियों में विवि की रैकिंग की जा रही है। हर विवि की श्रेणी के हिसाब से रैकिंग कर रहे हैं। रैकिंग काफी महत्वपूर्ण है। इससे इंटरनेशनल रैकिंग में भारत के 91 से ज्यादा शैक्षिक संस्थान हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रैकिंग के पैरामीटर्स अलग हैं। इसके लिए हमारे संस्थान टॉप 100-200 में नहीं पहुंच पा रहे हैं। 

डॉ अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि 10, 12 या ग्रेजुएशन करने के बाद एजुकेशन समाप्त हो गई, यह बात दिमाग से निकालनी पड़ेगी। लाइफ लॉन्ग लर्नर बनना पड़ेगा। जब तक यह नहीं करेंगे तो छात्रों को कैसे बताएंगे और कैसे आगे बढ़ाएंगे? डिग्री की भी पांच और दस साल बाद एक्सपायर करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

ऑनलाइन भी री लर्निंग स्टडी की जा सकती है। कंपनियों को भी कर्मचारियों के कौशल पर ध्यान देना चाहिए। स्टाफ को एक महीने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम में भाग लेने के लिए भेजा जाना चाहिए। डॉ. अनिल ने कहा कि 400 विवि कौशल विकास के लिए कोर्स करा रही हैं। रोजगार दे रही हैं। बाकी सभी विवि जल्द इसे शुरू कर देंगे।  

संवाद के मंच पर तकनीक और शिक्षा पर मंथन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

नई शिक्षा नीति पर भी हुई बात

डॉ. अनिल सहस्रबुद्धे ने नई शिक्षा नीति पर कहा कि देश की नई शिक्षा नीति में कई ऐसी चीजों का उल्लेख है जिससे भारत उन्नत राष्ट्र बनेगा। नई शिक्षा नीति बेहतरीन है, जिसकी कई देशों ने तारीफ की है। पॉलिसी को लोगों के बीच पहुंचाने की जरूरत है। चार साल बाद भी कई विवि इसे जमीन पर उतारने की पहल कर रहे हैं।

कोचिंग से अच्छी शिक्षा स्कूल में मिल सकती है। कई आईटीआई भी इसे लेकर पहल कर रहे हैं। कई आईटीआई कोटा की तरह घ बैठे कोचिंग की सुविधा दे रहे हैं। इसके लिए अभिभावकों को जागरूक होने की जरूरत है। 

आईआईएससी से कर चुके हैं पढ़ाई

सहस्रबुद्धे ने कर्नाटक विश्वविद्यालय के अंतर्गत बीवीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी , हुबली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और स्वर्ण पदक विजेता रहे। इसके बाद, उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
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निभा चुके हैं ये जिम्मेदारियां

कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे (सीओईपी) में प्रतिनियुक्ति पर निदेशक के रूप में शामिल होने से पहले , सहस्रबुद्धे 1995 में आईआईटी गुवाहाटी में संकाय के सदस्य थे और विभागाध्यक्ष, पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष, जेईई के अध्यक्ष, अकादमिक मामलों के डीन और उप निदेशक सहित कई जिम्मेदारियां निभाईं।

इससे पहले, वह एनईआरआईएसटी , ईटानगर में एक व्याख्याता और सहायक प्रोफेसर भी थे। उन्होंने 2005 से 2015 तक सीओईपी के निदेशक के रूप में कार्य किया। उन्होंने यूजीसी की अधिकार प्राप्त बुनियादी विज्ञान अनुसंधान (बीएसआर) समिति के अध्यक्ष और एनआईटी-अरुणाचल प्रदेश के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष जैसे अन्य जिम्मेदारियां भी निभाईं, वे जुलाई 2015 से 1 सितंबर 2022 तक एआईसीटीई के अध्यक्ष थे। वहीं, वर्तमान में वह 2 सितंबर, 2022 से अब तक राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं।
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