न कोई ईमेल मिला, न फॉर्म भरा
बयान में कहा गया, “सावधानीपूर्वक सत्यापन के बाद यह पाया गया है कि सुमीत कपाही नामक आवेदक की ओर से डुप्लीकेट डिग्री या मार्कशीट जारी करने के संबंध में न तो कोई शारीरिक और न ही ईमेल के माध्यम से कोई अनुरोध प्राप्त हुआ है।”
हालांकि, विश्वविद्यालय ने यह जानकारी जरूर दी कि 16 जुलाई, 2025 को दीपेश नाम के एक व्यक्ति द्वारा "मिसलेनियस" कैटेगरी के अंतर्गत छह साल से पुरानी मार्कशीट जारी करने के लिए एक भुगतान किया गया था, जिसमें सुमीत कपाही का नाम दर्ज था। लेकिन यह भुगतान किसी औपचारिक आवेदन के साथ नहीं था।
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बयान के अनुसार, “आवेदक/छात्र श्री सुमीत कपाही ने न तो ऑनलाइन और न ही ऑफलाइन कोई फॉर्म भरा है और न ही औपचारिक रूप से डुप्लीकेट डिग्री या मार्कशीट के लिए आवेदन किया है।”
डीयू प्रशासन ने सुमीत कपाही को सलाह दी है कि वे विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट https://exam.du.ac.in/index.php?Services/Duplicate-Marksheet के जरिए आवेदन करें और आवश्यक शुल्क जमा कर दस्तावेज प्राप्त करें।