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CBSE: अब स्कूल की बनी हुई इमारत के क्षेत्रफल के आधार पर तय होंगे सेक्शन, सीबीएसई ने बदले संबद्धता नियम

Thu, 31 Jul 2025 07:02 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने संबद्धता नियमों में बदलाव किया है। अब स्कूलों में सेक्शन की संख्या स्कूल भवन के बने हुए क्षेत्रफल (बिल्ट-अप एरिया) के आधार पर तय होगी, न कि जमीन के क्षेत्रफल पर। सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी में समान सेक्शन मिलेंगे।
 
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CBSE Revises Affiliation Rules - फोटो : CBSE
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विस्तार
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CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने संबद्धता उप-नियमों में अहम बदलाव करते हुए अब यह तय किया है कि किसी स्कूल में अधिकतम कितने सेक्शन चलाए जा सकते हैं, यह स्कूल की बनी हुई इमारत (बिल्ट-अप कारपेट एरिया) के आधार पर तय किया जाएगा।

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सीबीएसई सचिव हिमांशु गुप्ता के अनुसार, बोर्ड को स्कूलों और अन्य हितधारकों से लगातार यह सुझाव मिल रहे थे कि कई क्षेत्रों में जमीन की उपलब्धता बहुत कम है। इस कारण स्कूलों को नए छात्रों के प्रवेश के दबाव में भी अतिरिक्त सेक्शन शुरू करने में परेशानी होती है, क्योंकि मौजूदा नियमों में भूमि के आकार के अनुसार ही सेक्शन की सीमा तय होती है।

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इसलिए किया नियम में बदलाव

उन्होंने बताया कि कई बार स्कूलों के लिए 1:40 के छात्र-सेक्शन अनुपात को बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है, जबकि नए दाखिलों की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में सीबीएसई ने यह निर्णय लिया है कि अब स्कूलों को अधिकतम सेक्शन की अनुमति उनके स्कूल भवन के कुल बने हुए क्षेत्र (कारपेट एरिया) के आधार पर दी जाएगी।

इस बिल्ट-अप एरिया का सत्यापन स्थानीय निकाय या किसी लाइसेंस प्राप्त आर्किटेक्ट से करवाना अनिवार्य होगा। वहीं, जमीन के क्षेत्रफल का उपयोग केवल स्कूल की श्रेणी तय करने में किया जाएगा - जैसे कि ब्रांच स्कूल, मिडिल लेवल स्कूल, सेकेंडरी या सीनियर सेकेंडरी स्कूल।
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ये हुए बदलाव

नए नियमों के तहत, स्कूलों को अब सेकेंडरी (कक्षा 9-10) और सीनियर सेकेंडरी (कक्षा 11-12) स्तर पर बराबर संख्या में सेक्शन की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, इन दोनों स्तरों पर अधिकतम सेक्शन की संख्या को स्कूल में बालवाटिका से लेकर कक्षा 10 और 12 तक संचालित सभी सेक्शन की कुल संख्या का एक-चौथाई हिस्सा मानते हुए तय किया जाएगा।

यह बदलाव उन स्कूलों के लिए राहत लेकर आएगा जो सीमित जमीन में भी नए छात्रों को दाखिला देना चाहते हैं और पहले से तय सीमा के कारण ऐसा नहीं कर पाते थे। अब इमारत की वास्तविक उपयोगी जगह के आधार पर सेक्शन बढ़ाने की अनुमति मिलेगी।
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