इसलिए किया नियम में बदलाव
उन्होंने बताया कि कई बार स्कूलों के लिए 1:40 के छात्र-सेक्शन अनुपात को बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है, जबकि नए दाखिलों की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में सीबीएसई ने यह निर्णय लिया है कि अब स्कूलों को अधिकतम सेक्शन की अनुमति उनके स्कूल भवन के कुल बने हुए क्षेत्र (कारपेट एरिया) के आधार पर दी जाएगी।
इस बिल्ट-अप एरिया का सत्यापन स्थानीय निकाय या किसी लाइसेंस प्राप्त आर्किटेक्ट से करवाना अनिवार्य होगा। वहीं, जमीन के क्षेत्रफल का उपयोग केवल स्कूल की श्रेणी तय करने में किया जाएगा - जैसे कि ब्रांच स्कूल, मिडिल लेवल स्कूल, सेकेंडरी या सीनियर सेकेंडरी स्कूल।
ये हुए बदलाव
नए नियमों के तहत, स्कूलों को अब सेकेंडरी (कक्षा 9-10) और सीनियर सेकेंडरी (कक्षा 11-12) स्तर पर बराबर संख्या में सेक्शन की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, इन दोनों स्तरों पर अधिकतम सेक्शन की संख्या को स्कूल में बालवाटिका से लेकर कक्षा 10 और 12 तक संचालित सभी सेक्शन की कुल संख्या का एक-चौथाई हिस्सा मानते हुए तय किया जाएगा।
यह बदलाव उन स्कूलों के लिए राहत लेकर आएगा जो सीमित जमीन में भी नए छात्रों को दाखिला देना चाहते हैं और पहले से तय सीमा के कारण ऐसा नहीं कर पाते थे। अब इमारत की वास्तविक उपयोगी जगह के आधार पर सेक्शन बढ़ाने की अनुमति मिलेगी।