दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, पांच जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के विधि पाठ्यक्रम के मध्यवर्ती सेमेस्टर के लिए ऑनलाइन ‘ओपन बुक’ परीक्षा आयोजित करने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है। उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि छात्र एक पेशेवर पाठ्यक्रम की परीक्षा की शर्तों को निर्धारित नहीं कर सकते। अदालत उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देगी। गौरतलब है कि बीते वर्ष कोविड-19 महामारी के कारण परीक्षा का आयोजन नहीं हो पाया था।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के द्वितीय और अंतिम वर्ष के छात्रों की चार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ कर रही हे। जस्टिस जालान ने कहा, मैं छात्रों को एक पेशेवर पाठ्यक्रम की परीक्षा की शर्तों को निर्धारित करने की अनुमति नहीं दूंगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग के अनुरूप विश्वविद्यालय को लिखित परीक्षा के बजाए असाइनमेंट आधारित परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा, कि न्यायालय विश्वविद्यालय को असाइनमेंट आधारित परीक्षा आयोजित करने के लिए बाध्यता निर्देश नहीं दे सकता। पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिस पर विचार करने के लिए विश्वविद्यालय ही अधिकृत है। विश्वविद्यालय के नीतिगत निर्णय में न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। हालांकि, जस्टिस जालान की पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कहा कि परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा जल्द से जल्द की जाए।
डीयू की वकील सीमा डोलो ने कहा कि बीसीआई की सिफारिश के अनुसार, परीक्षा का तरीका चाहे ऑनलाइन, ऑफलाइन, मिश्रित या असाइनमेंट आधारित हो, इसे संबंधित संस्थान के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए। जबकि अंतिम वर्ष के विधि छात्र की तरफ से पेश अधिवक्ता सिद्धार्थ सीम ने दलील दी कि पिछले साल के मध्यवर्ती सेमेस्टर दो और चार के लिए ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षाएं छात्रों के हित में नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान डीयू में विधि संकाय की डीन प्रोफेसर वंदना ने न्यायालय को बताया कि परीक्षा जुलाई में ही आयोजित होने की संभावना है और कोरोना या किसी अन्य कारण से पहले दौर में शामिल न हो पाने वाले उम्मीदवारों को सितंबर में परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाएगा। अदालत ने इसके साथ ही चारों याचिकाओं का निपटारा कर दिया।