रिजल्ट देखकर खुद भी नहीं हुआ यकीन
अपनी सफलता के बाद देविना ने बताया कि जब उन्होंने अपना परिणाम देखा तो उन्हें पहले यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कई बार अपना आवेदन विवरण जांचा ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि कहीं कोई गलती तो नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "मैं बार-बार एप्लीकेशन नंबर चेक करती रही क्योंकि मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैंने पूरे देश में टॉप किया है।"
उन्होंने कहा कि उन्हें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर टॉप करना उनकी कल्पना से भी परे था। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, शिक्षक और स्कूल के लोग भी बेहद खुश हैं।
लगातार पढ़ाई को बताया सफलता का राज
देविना का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक पढ़ाई करने की बजाय नियमित और संतुलित तैयारी पर ध्यान दिया।
उनकी रणनीति हर विषय को रोज समय देना, लगातार रिवीजन करना और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करना थी। उनके अनुसार, आखिरी समय में ज्यादा पढ़ाई करने की बजाय पूरे साल अनुशासित तरीके से तैयारी करना अधिक प्रभावी साबित हुआ।
उन्होंने कहा, "मैं हर दिन हर विषय की पढ़ाई करती थी। मैंने कभी भी सिर्फ एक चीज पर ध्यान केंद्रित करके बाकी चीज़ों को नहीं छोड़ा। मैंने नियमित रूप से रिविजन किया और पिछले वर्षों के कई प्रश्न-पत्र हल किए।"
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बोर्ड परीक्षा के बाद आई थीं कई चुनौतियां
देविना ने बताया कि बोर्ड परीक्षाएं खत्म होने के बाद शुरुआती दौर में उन्हें काफी उलझन महसूस हुई। CUET की तैयारी का तरीका समझना और सही दिशा में पढ़ाई करना आसान नहीं था।
उन्होंने स्वीकार किया कि भविष्य को प्रभावित करने वाली इस परीक्षा का दबाव भी था। ऐसे समय में उनके माता-पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद की।
इंग्लिश ऑनर्स पढ़ना चाहती हैं देविना
राष्ट्रीय स्तर पर टॉप करने के बावजूद देविना अपने करियर को लेकर स्पष्ट सोच रखती हैं। वह आगे चलकर इंग्लिश ऑनर्स में पढ़ाई करना चाहती हैं क्योंकि उन्हें साहित्य, पढ़ने और लिखने में विशेष रुचि है।
इसके साथ ही वह पत्रकारिता के क्षेत्र में भी करियर बनाने पर विचार कर रही हैं। हालांकि उनका कहना है कि अभी वह विभिन्न संभावनाओं को खुला रखना चाहती हैं और समय के साथ अपने अंतिम फैसले पर पहुंचेंगी।
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राजनीति में आने की संभावना से भी इनकार नहीं
देविना, बिजवासन से भाजपा विधायक और दिल्ली के पूर्व परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत की बेटी हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से अपने पिता को सार्वजनिक जीवन में काम करते हुए देखने के कारण उनकी राजनीति में भी रुचि बनी है।
उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हालांकि फिलहाल उनकी प्राथमिकता उच्च शिक्षा है और भविष्य में राजनीति में आने का फैसला अनुभव और परिस्थितियों के आधार पर होगा।
बेटी की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे पिता
कैलाश गहलोत ने अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह उसकी मेहनत, समर्पण और लगन का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि परिवार ने कभी भी बेटियों पर पढ़ाई को लेकर अनावश्यक दबाव नहीं डाला। उनका प्रयास हमेशा उन्हें सहयोग और प्रोत्साहन देने का रहा है। उन्होंने देविना की मां, शिक्षकों और डीपीएस वसंत कुंज स्कूल के योगदान की भी सराहना की।