मेवाणी ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे में बीटेक कैमिकल ब्रांच के प्रथम वर्ष के छात्र दर्शन सोलंकी की मौत आत्महत्या थी या हत्या या रैगिंग के दौरान जाति आधारित भेदभाव का नतीजा है, यह पता लगाने के लिए एक एसआईटी जांच आवश्यक है। हालांकि, आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने संस्थान में रैगिंग, जातिगत पूर्वाग्रह के आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि मृतक के दोस्तों से मिली शुरुआती जानकारी से पता चला है कि कोई भेदभाव का मामला नहीं था।
18 वर्षीय सोलंकी ने रविवार, 12 फरवरी को आईआईटी के पवई परिसर में कथित तौर पर एक छात्रावास की इमारत की सातवीं मंजिल से छलांग लगाई थी। जिससे उसकी मौत हो गई। लेकिन उसके परिवार को उसकी मौत में साजिश का संदेह है। सोलंकी के अहमदाबाद स्थित परिवार के सदस्यों से मिलने के बाद मेवाणी ने कहा कि दलित समुदाय ने दिवंगत छात्र के समर्थन में 19 फरवरी को देशव्यापी कैंडल मार्च निकालने का आह्वान किया है।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि दर्शन के पिता रमेश सोलंकी ने मुझे बताया कि जब वह शव लेने के लिए मुंबई गए तो उन्हें अपने मृत बेटे का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया। उन्हें संस्थान द्वारा फोन पर अलग-अलग बातें बताई गईं और प्रोफेसरों ने अलग-अलग कहानियां सुनाईं। पूरा मामला संदिग्ध लगता है।
उन्होंने यह दावा भी किया कि मुंबई पुलिस आकस्मिक मौत के मामले से संबंधित कागजात पिता को सौंपने के लिए तैयार नहीं थी, और आईआईटी बॉम्बे के डीन और अन्य अधिकारी भी संवेदनशील नहीं थे। मेवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने, शोक संतप्त परिजनों से मिलने और एसआईटी जांच के आदेश देने की अपील की है।