क्या है नैड और कैसे बनाएं नि:शुल्क आईडी?
केंद्र सरकार ने विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए एकेडमिक अवॉर्ड्स और दस्तावेजों के लिए नैड यानी नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी पोर्टल की शुरुआत की थी। इस पोर्टल पर मार्कशीट्स और सर्टिफिकेट्स को डिजिटलाइजेशन के जरिये सुरक्षित रखा जाता है। नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आईडी बनाना पूरी तरह से निशुल्क है। नैड पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों को आप 24x7 कभी भी कहीं भी देख और उपयोग कर सकते हैं।
नैड आईडी से होंगे तीन बडे़ फायदे
नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी में सीटेट सर्टिफिकेट अपलोड होने से तीन बड़े फायदे होते हैं। पहला फायदा यह कि मार्कशीट, सर्टिफिकेट में अब किसी प्रकार से कोई टेंपरिंग या छेड़छाड़ नहीं हो पाएगी, क्योंकि ये डिजिलॉकर में पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। जबकि दूसरा फायदी यह कि डिजिलॉकर की नैड यानी नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी आईडी की सुविधा से उम्मीदवारों के लिए मार्कशीट और प्रमाण-पत्रों की बार-बार फोटोकॉपी या प्रिंट आउट कराने का झंझट भी खत्म हो जाता है। वहीं, तीसरा यह कि नौकरी, दाखिले और साक्षात्कार के समय अक्सर नियोक्ताओं को अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का वेरीफिकेशन करना पड़ता है।
विशेष क्यूआर कोड से होता है वेरीफिकेशन
डिजिटल लॉकर वेबसाइट पर नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी आईडी सुविधा का इस्तेमाल करने वाला देश का पहला बोर्ड सीबीएसई बना था। इसने जनवरी 2021 के सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटेट या सीटीईटी) की मार्कशीट और सर्टिफकेट को नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी में जारी किया था। सीबीएसई द्वारा डिजिलॉकर पर अपलोड कर दिए जाने के बाद उनके मोबाइल नंबर पर इनकी सूचना और लॉग इन डिटेल भेजी जाती है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीटेट मार्कशीट और प्रमाण-पत्र पर एक विशेष क्यूआर कोड बनाया जाता है। इस कोड को डिजिलॉकर मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से स्कैन करके सर्टिफाइड और वेरीफाई किया जा सकता है।