डिजिटल और प्रिंट रूप में कराया जाएगा उपलब्ध
अधिकारी के अनुसार, यह मोनोग्राफ किसी शैक्षणिक साझेदार या एजेंसी के माध्यम से तैयार किया जाएगा, जिसे खुले चयन प्रक्रिया से चुना जाएगा। तैयार होने के बाद इसे डिजिटल और प्रिंट, दोनों स्वरूपों में स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
खगोल विज्ञान और वास्तुकला में भी होगा गणित का उल्लेख
अधिकारियों ने बताया कि इस दस्तावेज में भारतीय गणित के उपयोग को खगोल विज्ञान, वास्तुकला, वाणिज्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी दर्शाया जाएगा। सामग्री की प्रामाणिकता के लिए इसमें मूल संस्कृत श्लोकों का अनुवाद और संदर्भ स्रोत भी शामिल किए जाएंगे।
इन ग्रंथों और विद्वानों का होगा जिक्र
मोनोग्राफ में प्रमुख गणितज्ञों, विचारधाराओं और ग्रंथों जैसे शुल्ब सूत्र, आर्यभाटिया, ब्रह्मस्फुट सिद्धांत, लीलावती और केरल स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स के योगदान को विस्तार से शामिल किया जाएगा। इसमें जीवन परिचय, समय-रेखाएं, चित्रों के माध्यम से उदाहरण और विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने वाली सामग्री भी जोड़ी जाएगी।
विशेषज्ञ समिति करेगी मार्गदर्शन
सीबीएसई इस परियोजना के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति बनाएगा, जिसमें गणित के इतिहासकार, संस्कृत विद्वान, गणित शिक्षा विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल होंगे। यह समिति मोनोग्राफ की संरचना और सामग्री पर मार्गदर्शन देगी।
अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना के लिए धनराशि पाठ्यक्रम शोध और संसाधन विकास के लिए अकादमिक इकाई के बजट से या सक्षम प्राधिकारी की विशेष मंजूरी से ली जाएगी।