हाईकोर्ट ने सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों को दसवीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के लिए तैयार किए गए अंको को प्रकाशित करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने रिजल्ट आने से मात्र 11 घंटे पहले आने पर याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि परिणामों पर इस स्तर पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति नवीन चावला की अवकाशकालीन पीठ ने याचिका को पब्लिसिटी स्टंट करार देते हुए कहा कि आपको व्यावसायिक याचिकाकर्ता की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए था। याचिका ने अदालत से अंको को निर्धारित करने का फार्मूला सावर्जनिक करने व स्कूलों को अपनी वे वेबसाइड पर डालने की मांग की थी।
पीठ ने कहा कि इस मामले में दायर आपकी याचिका लंबित है और अदालत ने याचिका पर अगस्त माह में सुनवाई तय की है। आपको पता था कि रिजल्ट पहले आना है लेकिन अंतरिम स्थगन के लिए एक आवेदन दायर नहीं किया। अब आप अवकाश के दौरान एक मौका लेने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आप 11 घंटे पहले आंएगे और सब कुछ रुक जाएगा। आप इसे मौके के खेल के रूप में ले जा रहे हैं। मुकदमेबाजी मौके का खेल नहीं है। अदालत ने कहा मामलों का फैसला पक्षकारों को सुनने के बाद किया जाता है।
अदालत ने कहा यदि आपको लगता है कि किसी मामले में बुरा परिणाम है, तो आप विशेष उदाहरण के साथ अदालत आ सकते हैं। मात्र आशंका के आधार पर पर पूरे सिस्टम को नहीं रोका जा सकता।