वर्ष की शुरुआत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कक्षा दसवीं की परीक्षा रद्द कर दी थी। जिसके बाद कक्षा 10वीं के प्राइवेज छात्रों का परिणाम तैयार करने के लिए बोर्ड द्वारा मूल्यांकन नीति तैयार की गई। कक्षा दसवीं में पढ़ने वाली प्राइवेट छात्रा की मां ने इस मूल्यांकन की पद्धति के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसके बाद न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को दायर याचिका पर जवाब देना का समय दिया था।
वकील ने मांगा 10 दिन का समय
हालांकि 29 जुलाई की हुई सुनवाई में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के वकील रूपेश कुमार ने कक्षा 10वीं की परीक्षाओं के लिए निजी अभ्यर्थियों के मूल्यांकन के लिए कार्यप्रणाली पर निर्देश लेने के लिए दस दिन का और समय मांगा है। अब आगे की सुनवाई 23 अगस्त को होगी। बता दें कि सीबीएसई को नोटिस जून में जारी किया गया था जब अदालत ने शिक्षा निकाय को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था।
याचिका में पायल बहल ने यह कहा
अपनी याचिका में, पायल बहल ने कहा है कि जहां परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद छात्रों को पास घोषित कर किया गया है, वहीं सीबीएसई ने अभी तक निती छात्रों का अंतिम परिणाम तैयार करने के लिए अपनी नीति के बारे में कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। कक्षा 10वीं की परीक्षा में निजी तौर पर नामांकित छात्रों के प्रति सीबीएसई का रवैया "प्रथम दृष्टया भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है" जो आगे की शिक्षा के साथ आगे बढ़ने के उनके समान अवसर को छीन लेता है।