न ज्यादा कठिन, न ज्यादा आसान रही अंग्रेजी की परीक्षा
अमर उजाला डिजिटल की एजुकेशन टीम से एक निजी स्कूल की 10वीं कक्षा के अंग्रेजी विषय की शिक्षक आरती गुलिवानी ने कहा कि पेपर का कठिनाई का स्तर देखा जाए तो यह एक संतुलित पेपर था, न ज्यादा कठिन और न ज्यादा आसान था। सेक्शन-सी लिटरेचर के प्रश्नों के जवाब उन विद्यार्थियों ने अच्छी तरह से दिए होंगे, जिन्होंने बेहतर तरीके से चैप्टर को समझा होगा। पूरा पेपर छात्रों की किताबों से आया था। औसत छात्र समेत अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए पेपर अच्छा आया। शिक्षक आरती के अनुसार औसत छात्रों को 40 में से 28 से 32 के बीच अंक आ सकते हैं। वहीं, होनहार छात्रों के 38 अंक तक आ सकते हैं।
सीबीएसई 10वीं इंग्लिश टर्म-1 बोर्ड पेपर को यहां पर देखें
प्रश्न संख्या 43 के दो विकल्प एक समान
दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 के राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय (आरपीवीवी) की शिक्षक योगेश यादव ने कहा कि पेपर में प्रश्न संख्या 43 के चार विकल्प में से दो विकल्प एक समान थे। इन दो विकल्पों में से किसी भी विकल्प को चुनने वाले छात्रों का जवाब सही है। पेपर को 90 मिनट में आराम से किया जा सकता है। अंग्रेजी के 10वीं टर्म 1 बोर्ड परीक्षा के सैंपल पेपर्स काफी आसान थे। इसकी तुलना में शनिवार का पेपर संतुलित था। इसमें बारिकी से छात्रों की समझ को परखा गया। अपने पाठ्यक्रमों का विस्तार से अभ्यास करने वालों छात्रों के लिए पेपर अच्छा था।
सीबीएसई 10वीं इंग्लिश आंसर की
सेक्शन-बी और सी को करने में आया मजा
दसवीं कक्षा के कई छात्रों को सेक्शन-बी और सी को करने में मजा आया। वहीं, सेक्शन-ए में छात्रों को सवालों को हल करने में अधिक समय लगा। छात्रों ने कहा कि सेक्शन-ए रीडिंग के सवाल लंबे थे। इसके सवालों को अच्छी तरह से पढ़कर फिर हल करने में सेक्शन-बी और सी की तुलना में थोड़ा ज्यादा समय लगा। पैसेज सेक्शन थोड़ा उलझन भरा था। छात्रों ने कहा कि 90 मिनट की अवधि में पूरा पेपर किया जा सकता है।
सेक्शन-ए में 13वें और 14वें प्रश्न की नहीं थी हेडिंग
10वीं बोर्ड के अंग्रेजी की परीक्षा के सेट-4 में मौजूद सेक्शन-ए रीडिंग में 13वें और 14वें प्रश्न की हेडिंग नहीं थी। इस कारण छात्रों को सेक्शन-ए में विकल्प के तौर पर मिलने वाले सवालों की संख्या में कमी रह गई। पैसेज रीडिंग में इन दोनों प्रश्नों में सिर्फ चार विकल्प दिए गए थे। छात्रों ने कहा कि इन दोनों प्रश्नों के कारण थोड़ी उलझन हुई। हालांकि, परीक्षा केंद्रों पर शिक्षकों ने छात्रों की दुविधा को कम करने की कोशिश अवश्य की। शिक्षकों ने भी इस बात पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बच्चों को स्पष्ट रूप से जानकारी ही नहीं होगी कि उन्हें किस सवाल के चार विकल्पों में से एक को चुनना है तो वह किस विकल्प पर बॉल पेन से निशान लगाएंगे।