विषय : परफॉर्मेंस मार्केटिंग
अतिथि वक्ता : बिल्वा भट्टाचार्जी, डिजिटल मार्केटिंग हेड, एम3एम इंडिया प्रालि.
सफलता.कॉम द्वारा परफॉर्मेंस मार्केटिंग विषय पर आयोजित कराए गए मास्टर क्लास सेशन में एमथ्रीएम इंडिया प्रालि. के डिजिटल मार्केटिंग हेड बिल्वा भट्टाचार्जी ने 15 साल पुराने अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि 2007-8 में आईप्रोस्पैक्ट नाम से एक डिजिटल एजेंसी आई थी जिसे पहली डिजिटल एजेंसी माना जा सकता है। उस समय गूगल, पीपीसी भारतीय मार्केट में एकदम नए थे। परफॉर्मेंस पर काम करने के लिए मुझे 3 महीने की ट्रेनिंग दी गई। उस समय फेसबुक नहीं था और जो हमारे क्लाइंट्स होते थे वो भारतीय कम होते थे यूएस या अन्य देशों के क्लाइंट्स पर हम काम करते थे। उस समय डिजिटल सेक्टर को लेकर अनिश्चितताएं भी थीं कि पता नहीं कितना आगे तक ये फील्ड जा पाएगा।
उन्होंने 2 साल में 1 करोड़ का बिजनेस देने पर कहा कि जब आप सोशल प्लेटफॉर्म पर एड चलाते हैं तो लीड सबकी अलग अलग रहती है। लेकिन इसमें भी अगर आप जो प्रोडक्ट या सर्विस बेच रहे हैं उसके लिए गुणवत्ता पूर्ण लीड होना जरूरी है। साथ ही एड चलाने से पहले हमें ये भी देखना होगा कि हम किस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और हमारी छवि वहां कैसी है। कंपनी की रणनीति बनाते वक्त कस्टमर्स से लगातार संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों से हमें जरूर बात करनी चाहिए। ताकि ग्राहक बैकग्राउंड, उनकी हमारे ब्रांड के साथ आकांक्षाएं, आयु, आय सीमा आदि पता चल सकें। ताकि उन्हें समझते हुए एक बेहतर डिजिटल कैंपेन तैयार किया जा सके। बेहतर परफॉर्मेंस के लिए हम कैंपेन को एक से अधिक प्लेटफॉर्म्स जैसे गूगल, मेटा, लिंक्डइन आदि पर चला देंगे। साथ ही इसके अलावा लीड्स आने पर कितने क्लोजर हुए, हमारा आरओआई कैसा रहा इस पर रिपोर्ट बनानी चाहिए। जिसमें ये शामिल हो कि हमारी कौन सी रणनीति काम कर रही है। परफॉ़र्मेंस मार्केटिंग पर बिल्वा ने कहा कि इसे हम रिजल्ट ड्रिवेन मार्केटिंग कह सकते हैं। जो आपके बिजनेस गोल के साथ जुड़कर काम करती है। साथ ही आपकी कंपनी के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करती है।
बिल्वा ने कहा कि आजकल मार्केटिंग के माध्यम कई सारे हो गए हैं जैसे रेडियो, टीवी, यूट्यूब। इन मीडियम्स के होने के बावजूद कंपनियों का डिजिटल पर फोकस ज्यादा बढ़ा है। क्योंकि स्मार्टफोन और इंटरनेट सस्ता हो जाने से देश में इंटरनेट तक पहुंच एक बड़ी आबादी की हो चुकी है। तो लोग आजकल गैजेट्स पर ज्यादा समय व्यतीत कर रहे हैं। इसके अलावा कंपनियां आजकल परफॉर्मेंस आधारित काम करती हैं कि उन्हें देखना रहता है कि उन्होंने कितना ग्रोथ हासिल किया।
परफॉर्मेंस मार्केटिंग सिर्फ सोशल मीडिया हैंडल्स पर एड चलाकर ही नहीं बल्कि ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट के जरिये भी किया जा सकता है। आप ओआरएम में लोगों के सवालों के जवाब देकर आप परफॉर्मेंस मार्केटिंग कर सकते हैं। आजकल कई तरह के टूल्स आ गए हैं जो ये बता देते हैं कि प्लेटफॉर्म पर आपके ब्रांड के बारे में क्या बात हो रही है। किन की-वर्ड पर बात हो रही है।
बिल्वा ने अपने सफल कैंपेन्स पर बात करते हुए कहा कि अगर कोई नया ब्रांड है। और उन्हें शुरूआती दौर से ही कन्वर्जन लेके आना है। जबकि उनका कोई सर्च टर्म नहीं है। तो उनकी जागरूता के लिए पहले काम करना पड़ेगा। इसीलिये लोग प्रो़डक्ट लांच करने से पहले उसकी अवेयरनेस पर काम करते हैं। तो पहले ब्रांड्स को ब्रांड अवेयरनेस पर काम करना होगा।
परफॉर्मेंस मार्केटिंग में एआई और एमएल की भूमिका पर बिल्वा ने कहा कि लीड्स लेकर आना या जिस तरह के कस्टमर्स को जो चीज पसंद है उस तरह के क्रिएटिव्स तैयार करके दिखा देना तो फायदा जरूर कह सकते हैं। लेकिन एआई में ह्यूमन इंटरवेंशन ( मानवीय हस्तक्षेप) की जरूरत होती है। इसके अलावा परफॉर्मेंस मार्केटिंग में कस्टमर फीडबैक का भी बहुत बड़ा रोल है।
डिजिटल मार्केटिंग में महारत हासिल करने के लिए युवा नील पटेल को पढ़ सकते हैं। साथ ही सर्च इंजन लैंड और सर्च इंजन जनरल बहुत अच्छे फोरम हैं। उस पर युवा विजिट कर सकते हैं। उसपे आपको पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि अगर वह किसी भी कोर्स में इनरोल हैं, या कोई नई स्किल सीख रहे हैं तो उन्हें गहराई से जाकर चीजों को सीखना चाहिए। जैसे अगर किसी को गूगल एड के बारे में थोड़ा बहुत पता है। उससे पूछा गया कि आप कर लोगे उसने कहा कि मैं चला लूंगा। सिर्फ एड चलाने भर की बात नहीं है। एड चलाने के लिए डेमोग्राफिक चुनना, एज ग्रुप चुनना, आरओआई बेहतर लाना। जो लीड आये उनसे कन्वर्जन के लिए देना। एड की पूरी रिपोर्ट एनालाइज करना कई सारे काम हैं। मेरा छात्रों को सुझाव यही है कि जब आपका कॉसेप्ट क्लीयर होगा तभी आप उसे आगे चलकर एग्जीक्यूट कर पाओगे।
बिल्वा ने कहा कि मौजूदा समय में बहुत सारे सोशल प्लेटफॉर्म हैं जहां बड़ी संख्या में लोग हैं। कंपनियां इनपर अपने एड रन कराती हैं। तो आपको अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स को समझना चाहिए। आप अपने डमी अकाउंट्स बना लें और उनपर काम करें। क्योंकि पीपीसी या गूगल एड को थ्योरिटिकली पढ़ना और प्रैक्टिकली जानना दोनों अलग अलग बातें हैं। आप मेटा और गूगल दोनों पर डमी अकाउंट बनाओ और डमी एड रन करो। आपका आत्मविश्वास बढ़ जाएगा।
बिल्वा ने कहा कि सीखना बहुत जरूरी है। आप किसी भी उम्र में सीख सकते हैं। जो युवा अभी डिजिटल मार्केटिंग कोर्स कर रहे हैं 3 महीने बाद वो किसी नौकरी में होंगे। सीखने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इसलिये युवाओं से यही कहूंगा को वो खुद को लगातार अपडेट करते रहें।