देश-विदेश कहीं भी घूमने जाना हो, तो सबसे पहले हम नक्शा (मैप) देखकर उसके लोकेशन, दूरी आदि की जानकारी लेते हैं। कार में कहीं जाते समय रास्ता भटक गए, तो रोड मैप की मदद लेते हैं। पृथ्वी पर मौजूद स्थानों, नगरों, देशों, पर्वत, नदियों, झीलों, मैदानों, वनों आदि की जानकारी नक्शे से ही प्राप्त होती है।
जरा सोचिए, यदि नक्शा न होता, तो कहीं भी आना-जाना कितना मुश्किल होता। आखिर कौन बनाता है यह नक्शा? क्या कहते हैं, इस कला को और इसे बनाने वाले उस कलाकार को? दरअसल, पृथ्वी के सतह के किसी भाग के स्थिति को पैमाने की सहायता से कागज पर लघु रूप में बनाना मानचित्रण (कार्टोग्राफी) कहलाता है। कार्टोग्राफी मानचित्र बनाने और उसके इस्तेमाल करने की कला और विज्ञान है। जो लोग तरह-तरह के नक्शे और चार्ट्स की रेखाचित्र बनाने में माहिर होते हैं, उन्हें 'कार्टोग्राफर' या 'मैप मेकर' कहते हैं।
एक कार्टोग्राफर मैप विकसित और निर्माण करने के लिए उसके साइंटिफिक, टेक्नोलॉजिकल और कलात्मक पहलुओं से जुड़ा होता है। ये सर्वे, एरियल फोटोग्राफ्स, सेटेलाइट इमेजेज के साथ-साथ मैप, चार्ट्स और पृथ्वी के सतह के ड्रॉइंग्स से इक्ट्ठे किए गए डाटा का इस्तेमाल कर नक्शा बनाते हैं। यदि आपको देश-दुनिया के नक्शों को समझने, जानने में दिलचस्पी है, किसी खास क्षेत्र के नेवीगेशन को समझते हैं और उस पर एक मानचित्र बना सकते हैं, तब आपको अपने इस गुण को और ज्यादा निखारने की आवश्यकता है। एक करियर के रूप में कार्टोग्राफी आपके इस गुण को और ज्यादा तराश सकता है।
क्या है कार्टोग्राफी
कार्टोग्राफी का संबंध नक्शा या मानचित्र, ग्लोब्स आदि को बनाने की पढ़ाई से है। इसमें वैज्ञानिक और कलात्मक तत्व शामिल हैं। मानचित्र बनाने में इमेज प्रोसेसिंग, डाटा कैप्चर, डाटा मैनिपुलेशन, विजुअल डिस्प्ले आदि शामिल होता है। एक तरह से कहें, तो कार्टोग्राफर वह प्रोफेशनल होता है, जो कई तरह के मानचित्र बनाता है।
चूंकि कार्टोग्राफी में वैज्ञानिक, तकनीकी और कलात्मक पहलू होते हैं, इसलिए एक कार्टोग्राफर को इन सबकी अच्छी जानकारी होनी चाहिए। आज डिजिटल युग में कार्टोग्राफी बहुत आसान हो गई है। पहले कार्टोग्राफी करने के लिए जगह-जगह जाकर सर्वे किया जाता था। फिर हाथ से मानचित्र आदि बनाने पड़ते थे, लेकिन आज के डिजिटल युग में सेटेलाइट की मदद से कार्टोग्राफी का काम करना आसान हो गया है। उदाहरण के लिए, आप गूगल मैप को ले सकते हैं।
कहां-कहां होता है उपयोग
इन मानचित्रों का विभिन्न सरकारी विभागों, सुरक्षा संबंधी विभागों, नए शहर बसाने, नेवीगेशन, मौसम की रिपोर्ट्स, नई सड़कें एवं रेल लाइन बिछाने आदि जगहों पर उपयोग होता है।
नौकरी की संभावनाएं
जैसे-जैसे तकनीक का विस्तार हो रहा है, वैसे ही इस क्षेत्र में कार्टोग्राफर की मांग भी बढ़ रही है। अब तो स्थानीय स्तर के सरकारी विभागों में भी मानचित्र बनना शुरू हो गया है। सरकारी क्षेत्र के अलावा विभिन्न संगठन हैं, जो मैप्स आदि बनाने का काम करती हैं। आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग संगठनों में भी कार्टोग्राफर की मांग रहती है। आप खुद का भी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
शैक्षणिक योग्यता
भारत में कई शिक्षण संस्थान कार्टोग्राफी या इससे संबंधित क्षेत्र में स्नातक के पाठ्यक्रमों का संचालन करते हैं। इसके अलावा कार्टोग्राफी में मास्टर डिग्री भी होती है। 12वीं के बाद कार्टोग्राफी करना चाहते हैं, तो किसी संस्थान से कार्टोग्राफी में डिप्लोमा करके किसी संस्था से जुड़ सकते हैं। हाल के दिनों में कुछ संस्थानों ने एक साल के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की भी शुरुआत की है।
वेतन
सामान्य संस्थान से डिप्लोमा करने वाले इस क्षेत्र में शुरुआत में 10-12 हजार रुपये प्रतिमाह कमा सकते हैं। अमेरिका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, वर्ष 2024 तक कार्टोग्राफी के क्षेत्र में 29 प्रतिशत तक उछाल आने की संभावना है।
प्रमुख संस्थान
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई (www.iitb.ac.in)
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइंफॉर्मेटिक्स एंड रिमोट सेंसिंग, नोएडा (www.amity.edu)
जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली (jmi.ac.in)
अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई (www.annauniv.edu)