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BSEB Result: बिहार बोर्ड क्यों करता है टॉपर्स का वेरिफिकेशन? 2016 की वो घटना, जिसके बाद शुरू हुई ये परंपरा

Tue, 25 Mar 2025 12:25 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

BSEB Topper Verification 2025: बिहार बोर्ड टॉपर्स का वेरिफिकेशन इसलिए करता है ताकि परीक्षा परिणाम की विश्वसनीयता बनी रहे और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। यह प्रक्रिया 2016 के टॉपर्स घोटाले के बाद शुरू हुई। विस्तृत विवरण नीचे पढ़ें।

रिजल्ट घोषित होने पर छात्र अमर उजाला की वेबसाइट के माध्यम से दोनों ही कक्षाओं का रिजल्ट देख और डाउनलोड कर सकेंगे। छात्र यहां क्लिक करके  खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। पंजीकरण करने के बाद आपको परिणाम से जुड़ी हर ताजा अपडेट मिलती रहेगी। परिणाम जारी होने पर आपको नोटिफिकेशन भी भेजा जाएगा, जिससे आप सबसे पहले अपना रिजल्ट देख सकेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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BSEB Result 2025: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की 10वीं और 12वीं परीक्षा के नतीजों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। लाखों छात्र बेसब्री से रिजल्ट जारी होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी बोर्ड टॉपर्स की कॉपियों की दोबारा जांच और उनका साक्षात्कार (वेरिफिकेशन) कर रहा है, ताकि रिजल्ट को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सके। यह प्रक्रिया पूरी होते ही बोर्ड रिजल्ट की तारीख की घोषणा करेगा। रिजल्ट घोषित होने पर छात्र अमर उजाला की आधिकारिक वेबसाइट  पर जाकर सबसे पहले अपना रिजल्ट देख सकेंगे।  

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रिजल्ट देखने के लिए 10वीं के छात्र यहां पंजीकरण करें
रिजल्ट देखने के लिए 12वीं के छात्र यहां क्लिक करके रिजल्ट देख सकते हैं

टॉपर्स का वेरिफिकेशन क्यों जरूरी?

बिहार बोर्ड परीक्षा के नतीजे आते ही टॉपर्स का वेरिफिकेशन चर्चा में आ जाता है। हर साल बिहार विद्यालय परीक्षा समिति टॉपर्स का दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू आयोजित करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सही मायने में अपनी सफलता के हकदार हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह प्रक्रिया क्यों शुरू हुई? इसका सीधा संबंध 2016 में सामने आए इंटर टॉपर्स घोटाले से है, जिसने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया था।

जब टॉपर नहीं बता सका अपना विषय

बिहार बोर्ड द्वारा टॉपर्स का वेरिफिकेशन करने की परंपरा 2016 में हुई एक बड़ी विवादास्पद घटना के बाद शुरू हुई। 2016 में बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम की टॉपर रूबी राय का इंटरव्यू एक बड़ा विवाद बन गया था। जब एक मीडिया चैनल ने उनसे उनके विषय से जुड़े सवाल पूछे, तो वे सही जवाब नहीं दे पाईं। उन्होंने 'पॉलिटिकल साइंस' को 'प्रोडिकल साइंस' कहकर पेश किया, जिससे साफ हो गया कि टॉपर्स की मेरिट में गड़बड़ी हुई है। जांच में खुलासा हुआ कि कई छात्रों को फर्जी तरीके से टॉपर्स बनाया गया था, और इसके पीछे एक बड़ा रैकेट काम कर रहा था।

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घोटाले के बाद बदला सिस्टम, टॉपर्स का होने लगा वेरिफिकेशन

इस घटना के बाद बिहार बोर्ड ने अपनी छवि सुधारने के लिए टॉपर्स वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया। अब हर साल 10वीं और 12वीं परीक्षा के टॉपर्स को बोर्ड ऑफिस बुलाया जाता है, जहां वे इंटरव्यू और लिखित परीक्षा देते हैं। उनका दस्तावेज सत्यापन भी किया जाता है, ताकि यह तय किया जा सके कि वे योग्यता के आधार पर ही टॉप पर पहुंचे हैं।

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आज भी जारी है यह प्रक्रिया

2016 के बाद से बिहार बोर्ड ने टॉपर्स के वेरिफिकेशन को सख्ती से लागू किया है। इससे परीक्षा की पारदर्शिता बढ़ी है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है। अब हर टॉपर को बोर्ड के सामने अपनी काबिलियत साबित करनी होती है, जिससे फर्जीवाड़े की कोई संभावना न रहे।

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