क्या हैं लक्षण
लक्षणों की बात करें तो अगर आप अपने बच्चे के व्यवहार में किसी तरह का बड़ा बदलाव देखें जैसे वो अचनाक चुप रहने लगे, लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दें, कम बोले, खाना-पीना न खाए, दोस्तों से मिलना या बात करना भी अवॉइड करे तो समझ जाएं कुछ गड़बड़ है। अपने पसंदीदा कामों में भी रुचि न दिखाए, स्लीपिंग पैटर्न में बदलाव हो (इसमें ज्यादा सोना और कम सोना दोनों शामिल हैं), नॉर्मल रूटीन बदल जाए, पढ़ाई करना बंद कर दे, उसे घबराहट हो, पूरे समय मोबाइल चलाता रहे तो भी उससे बात करें।
एग्जाम स्ट्रेस क्यों होता है?
किसी भी परीक्षा से पहले उसमें होने वाले अपने प्रदर्शन को लेकर तनाव होने वाली स्थिति को एग्जाम स्ट्रेस कहा जाता है। अपनी तैयारी को कम आंकने, परीक्षा में रिजल्ट को लेकर अनिश्चितता होने, किसी तरह का मेंटल स्ट्रेस होने, परिवार या शिक्षकों से परीक्षा को लेकर अत्यधिक दबाव पड़ने पर स्टूडेंट्स को एग्जाम स्ट्रेस होता है।
दबाव देने पर पेरेंट्स कि कितनी भूमिका ?
एग्जाम को लेकर छात्रों पर दबाव डालने की पेरेंट्स की सबसे अधिक भूमिका होती है। बच्चे पर दबाव बनाने के बजाय माता-पिता को चाहिए कि बच्चों से बातचीत करें, उनका सहयोग करें और उन्हें सहज महसूस कराएं। थोड़ा-बहुत प्रेशर जिसे पॉजिटिव प्रेशर कहते हैं, वो ठीक है लेकिन हद से ज्यादा तनाव को हावी न होने दें।
बच्चा अकेला रहने लगे तो ?
अगर आपका बच्चा अचनाक पढ़ाई कम कर देता है और मोबाइल या टीवी से ज्यादा चिपकने लगता है। अगर वो सोने ज्यादा लगता है तो इसे उसकी बदमाशी में काउंट न करें। अगर आपका होशियार बच्चा अचानक ऐसे काम कर रहा है तो समझ लीजिए वह अपने मन में चल रही उलझनों से भागने के लिए अपना दिमाग डायवर्ट करने के तरीके तलाश रहा है। उससे बात करें, उसे आपकी मदद चाहिए, ऐसे में उसे आप बिल्कुल भी डांटें नहीं।
परीक्षा के दिन क्या करें?
एक अभिभावक होने के नाते सुनिश्चित करें कि बच्चा परीक्षा के दिन अच्छी नींद ले, अच्छा नाश्ता करे और परीक्षा के लिए आवश्यक हर चीज के लिए एक चैकलिस्ट रखे। इसके अलावा, अपने बच्चे को किसी भी चीज से अधिक प्रोत्साहित करें और उन्हें बताएं कि आपको उनके प्रयासों पर गर्व है। उन्हें अगली परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करें और उन गलतियों पर ध्यान न दें, जिन्हें उन्होंने महसूस किया है या उन्होंने बताया है।