महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी में वेबिनार
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महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, पत्रकारिता की रचनात्मक विधाएं और लेखन विषय पर वेब संगोष्ठी आयोजित कर रहा है। इस एक दिवसीय वेब संगोष्ठी का आयोजन 17 मई को है। वेब संगोष्ठी का आयोजन यूनिवर्सिटी के मीडिया अध्ययन विभाग की तरफ से किया जा रहा है। यह संगोष्ठी 17 मई को दोपहर तीन बजे से शुरू होगी। इस वेब संगोष्ठी में विभिन्न वक्ता कोरोनाकाल में पत्रकारिता की रचनात्मक विधाएं और लेखन विषय पर चर्चा करेंगे।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण कुमार भगत का कहना है कि इस वेब संगोष्ठी में कोरोना महामारी के वक्त पत्रकारिता की रचनात्मक विधाएं और लेखक, किस तरह हार्ड न्यूज की जगह ले रहा है, इस पर विमर्श किया जाएगा। उनका कहना है कि कोरोना वायरस के दौर में पत्रकारिता में हार्ड न्यूज की अपेक्षाकृत रचनात्मक लेखक अधिक हो रहा है। जब भी हार्ड न्यूज कम होता है, तो लोग वापस रचनात्मकता की तरफ आते हैं। इस दौर में समाज और जीवन उतना गतिशील नहीं है, जिस वजह से समाचार पत्र हार्ड न्यूज की जगह फीचर की तरफ वापस लौट रहे हैं। उनका कहना है कि आपातकाल के वक्त भी समाचार पत्रों ने ऐसा ही प्रयोग किया था। उस वक्त समाचार पत्रों ने चार-चार पृष्ठों के फीचर देने की व्यवस्था की थी।
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प्रोफेसर भगत का कहना है कि इस दौर में समाचार पत्रों के लिए रचनात्मक लेखन समय की मांग है। पत्रकारिता में समाचार के इतर संस्मरण, व्यंग्य, रिपोर्टाज आदि जो कुछ भी रचनात्मक है, वो सारी चीजें रचनात्मक लेखक के अंतर्गत आती हैं। ऐसे में इस वक्त में इस तरह की संगोष्ठियों का आयोजन सिर्फ विश्वविद्यालय ही करा सकते हैं।
इस संगोष्ठी से कोई भी जुड़ सकता है और वक्ताओं के पत्रकारिता की रचनात्मक विधाएं और लेखन पर विचारों को सुन सकता है। प्रोफेसर भगत का कहना है कि इस दौर में समाज में सकारात्मकता और सृजनात्मकता के लिए ही यह वेब सेमिनार आयोजित हो रहा है। उन्होंने कहा कि समाज में सृजनात्मकता पैदा हो इसलिए विश्वविद्यालयों को कोरोना महामारी के वक्त इस तरह की संगोष्ठियों को आयोजित करना चाहिए। इस संगोष्ठी के उद्घाटनकर्ता प्रोफेसर बीके कुठियाला और मुख्य अतिथि प्रोफेसर केजी सुरेश हैं। जबकि मुख्य वक्ता प्रोफेसर कुमुद शर्मा हैं।