Genomic Analysis : 650 और 250 सालों का इतिहास
विश्वविद्यालय के जंतू विज्ञान विभाग के प्रमुख गुलाब खेड़कर ने बताया कि लाल कंधारी गाय, देवनी बैल और उस्मानाबादी बकरी लंबे समय से इस क्षेत्र के लोगों को आर्थिक मदद दे रही है। कंधारी गाय और देवनी बैल का 650 और 250 सालों का इतिहास है। हालांकि, समय के साथ ही इनकी मूल विशेषताओं में परिवर्तन आया है। इनके दुग्ध उत्पादकता और रंजकता में बदलाव देखा गया है। इन मूल नस्लों का जीनोम विश्लेषण कर के सैंपल को इकट्ठा किया जाएगा और इनपर अध्ययन होगा। हम मराठवाड़ा क्षेत्र में इन मूल नस्लों को बचाने में सक्षम होंगे।