1916 में हुआ था जन्म
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को हुआ था। पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय और माता का नाम रामप्यारी था। हालांकि, जब वह 08 साल के ही थे तो उनकी माता-पिता दोनों का ही निधन हो गया। इसके बाद उनके मामा ने उनका ध्यान रखा। अपनी शिक्षा के दौरान ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आए। वह आगे चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक और भारतीय जन संघ (BJS) के सह-संस्थापक भी बनें।
स्वदेशी पर भी दिया जोर
पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वदेशी के भी बहुत बड़े समर्थक थे। उनका कहना था कि भारत के लिए एक स्वदेशी आर्थिक मॉडल विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसमें व्यक्ति केंद्र में हो। उन्होंने देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए 'भारतीय अर्थ नीति का अवमूल्यन' और 'भारतीय अर्थ नीति: विकास की एक दिशा' नाम की पुस्तक भी लिखी थी। इसके अलावा उन्होंने मासिक राष्ट्रीय धर्म, पांचजन्य और दैनिक स्वदेश भी शुरू किया था।
श्यामाप्रसाद मुखर्जी भी थे प्रभावित
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने उपाध्याय जी की कार्यकुशलता और क्षमता से प्रभावित होकर एकबार कहा था- यदि मुझे दो दीनदयाल मिल जाएं, तो मैं भारतीय राजनीति का नक्शा बदल दूं। हालांकि, 11 फरवरी 1968 की रात मुगलसराय के करीब का उनका आकस्मिक निधन हो गया था। उनके सम्मान में भारत सरकार ने मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन कर दिया है।
सरकार ने किया अंत्योदय दिवस का एलान
अंत्योदय का अर्थ होता है उत्थान, समाज के अंतिम स्तर तक आर्थिक, सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग का उदय। अंत्योदय शब्द पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ही दिया था। उनके सम्मान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को उपाध्याय जी की 98वीं जयंती के अवसर पर अंत्योदय दिवस की घोषणा की थी। साल 2015 से हर साल आधिकारिक तौर पर इस दिवस को मनाया जाता है।