आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव समीर शर्मा ने कहा कि जहां तक कर्मचारियों का संबंध है, राज्य का पुनर्गठन एक अप्रत्याशित घटना थी जिसने उनके जीवन और करियर को प्रभावित किया। इससे उनका कार्य-जीवन संतुलन प्रभावित हुआ। शर्मा ने बताया कि कई कर्मचारी जो चिकित्सा उपचार, पति या पत्नी के रोजगार, बच्चों की शिक्षा आदि जैसे विभिन्न कारणों से एक विशेष राज्य में रहना चाहते थे, उन्हें असंतोष और निराशा की स्थिति में छोड़ दिया गया है।
आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव ने कहा कि मानवीय आधार पर इन कर्मचारियों की चिंताओं को एकमुश्त उपाय के रूप में संबोधित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समस्या की भयावहता की पहली बार सरकारों के सामने एक स्पष्ट तस्वीर थी। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश की सरकार ने स्थायी आधार पर तेलंगाना जाने के इच्छुक कर्मचारियों से विकल्प मांगे थे और तदनुसार, 1,808 ने विकल्प का प्रयोग किया।
शर्मा ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने इन कर्मचारियों को तेलंगाना जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का फैसला किया है। अंतर-राज्यीय स्थानांतरण के माध्यम से इन कर्मचारियों का आदान-प्रदान करके, दोनों राज्य एक बार लंबे समय से लंबित मामले को सुलझा सकते हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव ने कहा कि मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि तेलंगाना सरकार की सहमति जल्द से जल्द उन कर्मचारियों के आदान-प्रदान के लिए दी जाए, जिन्होंने स्थायी आधार पर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने का विकल्प चुना है।