पुलिस को सूचना देने पर बच्चे को मारने की धमकी भी दी गई थी। जांच के दौरान रामजस स्कूल के मार्शल आर्ट प्रशिक्षक सलीम खान पर शक हुआ। एक पड़ोसी ने संदीप को 'मास्टरजी' नामक लंबे व्यक्ति के साथ रिक्शे में जाते देखा था। पुलिस ने सलीम खान से पूछताछ की, जिसके बाद उसने खुलासा किया। मुस्तफाबाद के भगीरथी वाटर पंप के पास एक नाले से संदीप का शव बरामद किया गया। पिता ने शव की पहचान की। आगे की जांच में सह-आरोपी अनिल का नाम सामने आया। अनिल ने 4 फरवरी, 1995 को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। उसकी झुग्गी से मृतक की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग बरामद हुए। जांच में पता चला कि फिरौती की कॉल अनिल ने की थी और उसी ने अपहरण का सुझाव दिया था।
कानूनी कार्रवाई और फरार होना
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। 5 अगस्त, 1997 को कड़कड़डूमा कोर्ट, दिल्ली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.एल. भायाना ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। उन्हें आजीवन कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोनों आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की। अपील लंबित रहने के दौरान सलीम खान को 24 नवंबर, 2000 को अंतरिम जमानत मिली। हालांकि, वह वापस अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। बाद में 19 जुलाई, 2011 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा। इस प्रकार वह 26 वर्षों से अधिक समय तक फरार रहा।