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यूट्यूबर सलीम केस: गिरफ्तारी से बचने के लिए खान से बना वास्तिक उर्फ अहमद, पहचान बदलकर छिपा था; ऐसे खुली पोल

Sat, 25 Apr 2026 04:02 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 31 साल पुराने अपहरण-हत्या केस में फरार सलीम खान को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। आरोपी ने पहचान बदलकर खुद को मृत घोषित किया था और 26 साल तक अलग-अलग जगहों पर छिपता रहा।
 
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आरोपी फेमस यूट्यूबर सलीम वास्तिक गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
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दिल्ली एआरएससी क्राइम ब्रांच ने 31 साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में एक आजीवन कारावास फरार हत्यारे को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर सलीम खान उर्फ सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक (54 वर्ष) के रूप में हुई है। सलीम ने वर्ष 1995 में 30,000 रुपये की फिरौती के लिए एक व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी थी। यह गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित लोनी से हुई है।

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यह मामला 21 जनवरी, 1995 को थाना गोकुलपुरी, दिल्ली में दर्ज किया गया था। मृतक संदीप बंसल 20 जनवरी, 1995 को अपने घर से रामजस स्कूल जा रहा था। वह शाम तक घर नहीं लौटा, जिससे परिवार चिंतित हो गया। अगले दिन 21 जनवरी को संदीप के पिता सीताराम को फिरौती के लिए फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि संदीप उनके कब्जे में है और 30,000 रुपये की फिरौती मांगी। यह रकम शाम 4:30 बजे लोनी फ्लाईओवर के पास बस स्टैंड पर रखने का निर्देश दिया गया। 

पुलिस को सूचना देने पर बच्चे को मारने की धमकी भी दी गई थी। जांच के दौरान रामजस स्कूल के मार्शल आर्ट प्रशिक्षक सलीम खान पर शक हुआ। एक पड़ोसी ने संदीप को 'मास्टरजी' नामक लंबे व्यक्ति के साथ रिक्शे में जाते देखा था। पुलिस ने सलीम खान से पूछताछ की, जिसके बाद उसने खुलासा किया। मुस्तफाबाद के भगीरथी वाटर पंप के पास एक नाले से संदीप का शव बरामद किया गया। पिता ने शव की पहचान की। आगे की जांच में सह-आरोपी अनिल का नाम सामने आया। अनिल ने 4 फरवरी, 1995 को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। उसकी झुग्गी से मृतक की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग बरामद हुए। जांच में पता चला कि फिरौती की कॉल अनिल ने की थी और उसी ने अपहरण का सुझाव दिया था।

कानूनी कार्रवाई और फरार होना
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। 5 अगस्त, 1997 को कड़कड़डूमा कोर्ट, दिल्ली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.एल. भायाना ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। उन्हें आजीवन कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोनों आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की। अपील लंबित रहने के दौरान सलीम खान को 24 नवंबर, 2000 को अंतरिम जमानत मिली। हालांकि, वह वापस अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। बाद में 19 जुलाई, 2011 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा। इस प्रकार वह 26 वर्षों से अधिक समय तक फरार रहा।

गिरफ्तारी से बचने के लिए पहचान बदलना 
गिरफ्तारी से बचने के लिए सलीम खान ने खुद को मृत घोषित करवा लिया था। उसने अपनी पहचान बदलकर सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद कर ली। पिछले 26 वर्षों से वह हरियाणा के करनाल और अंबाला जैसे विभिन्न स्थानों पर ठिकाने बदलता रहा। अंततः वह वर्ष 2010 में गाजियाबाद के लोनी में स्थायी रूप से बस गया। वहां उसने नसबंदी कॉलोनी में महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और अलमारी बनाने का काम भी करता रहा। एआरएससी क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम गंभीर मामलों में फरार आरोपियों की निगरानी कर रही थी। हेड कांस्टेबल मिंटू यादव को सूचना मिली कि यूट्यूबर सलीम खान इस मामले में शामिल है। कड़कड़डूमा कोर्ट से रिकॉर्ड प्राप्त किए गए और फिंगरप्रिंट व पुराने फोटो से पहचान की पुष्टि हुई। इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में एक टीम ने थाना लोनी, गाजियाबाद की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया।
 

आरोपी का व्यक्तिगत विवरण
सलीम खान का जन्म वर्ष 1972 में उत्तर प्रदेश के शामली जिले के मोहल्ला नानूपुरा में हुआ था। उसने शामली निवासी अफसाना से विवाह किया और उसके एक बेटा व एक बेटी हैं। उसने शामली में शाओलिन कुंग फू सीखा था। रोजगार की तलाश में वह अपने परिवार के साथ दिल्ली आया था। दिल्ली में उसने रामजस स्कूल, दरियागंज में मार्शल आर्ट प्रशिक्षक के रूप में काम करना शुरू किया। बाद में वह मुस्तफाबाद से जैकेट सप्लाई का काम भी करने लगा। यहीं उसकी मुलाकात सह-आरोपी अनिल से हुई थी। अनिल ने ही उसे अमीर परिवार के बच्चे का अपहरण करने का सुझाव दिया था।
 
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हालिया घटना 
फरार रहने के दौरान भी सलीम खान पर 27 फरवरी, 2026 को लोनी में हमला हुआ था। जीशान और गुलफाम नामक दो लोगों ने उसके ऑफिस में घुसकर चाकू से हमला किया। उसे गर्दन और पेट पर कई बार चाकू मारा गया था। पहले उसका इलाज गुरु तेग बहादुर अस्पताल में हुआ, फिर उसे मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत में भर्ती कराया गया। 25 मार्च, 2026 को वह ठीक होकर घर लौट आया था। इस हमले के संबंध में थाना लोनी में एफआईआर दर्ज की गई थी। उसे सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा अधिकारी भी उपलब्ध कराए गए थे। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को तिहाड़ जेल, दिल्ली में बंद कर दिया गया है।
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