नाटक पंचलाइट प्रस्तुत करते कलाकार
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पूरा विश्व 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस के रूप में मनाता है। रंगमंच प्रेमियों और इससे जुड़े कलाकारों के लिए यह बहुत बड़ा दिन होता है। विश्व स्तर पर सबसे पहले 1961 में अंतरराष्ट्रीय थियेटर इंस्टीट्यूट द्वारा इस दिन को रंगमंच दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई थी। इसी क्रम में शनिवार को जमशेदपुर के युवा रंगकर्मियों द्वारा स्थापित संस्थान थियेटर साधना और आरंभ युवा क्लब के संयुक्त तत्वाधान में सिदगोड़ा स्थित कंपनी लाइब्रेरी में एक दिवसीय नाट्य प्रस्तुति सह परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में आंचलिक भाषा के प्रतिष्ठित साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा लिखित एवं रंजीत कपूर द्वारा रूपांतरित लोक नाटक 'पंचलाइट' की जीवंत प्रस्तुति कलाकारों द्वारा की गई। पंचलाइट मूल रूप से बिहार के ग्रामीण परिवेश पर आधारित एक हास्य- व्यंग्य नाटक है, जो गांव की जातीय प्रथा पर चोट करती है।
नाटक का मंचन प्रेम शर्मा के निर्देशन में किया गया एवं मंच पर अन्य कलाकारों के रूप में पूजा दत्ता, सबा शेख, तारकेश्वर प्रसाद, अमन कुमार, विनय आनंद, कुणाल सन्निग्रही, प्रियंक प्रभात, समीर सादमान, अभिषेक चौधरी, निशान सिंह , प्रदीप और चंदन कुमार ने अपनी भूमिकाएं निभाई।