देश में स्तन कैंसर से ठीक होने वाली महिलाओं की संख्या अन्य एशियाई देशों की तुलना में बहुत कम है। शुक्रवार को विश्व कैंसर दिवस पर राजधानी के डॉक्टरों ने बताया कि दिल्ली उत्तर भारत का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। डॉक्टरों ने शीघ्र पता चलने की संभावना में सुधार लाने और बेहतर इलाज के लिए जागरूकता लाने की अपील की है।
डॉक्टरों के अनुसार साल 2020 में देश में स्तन कैंसर के 1,78,361 नए केस सामने आए और 90,408 मौतें दर्ज की गईं। भारत में इस कैंसर से प्रभावित महिलाओं की जीवित रहने की दर 25.3 से 48.4 फीसदी तक है, जो चीन (57.6-82.3%), थाईलैंड (55.8-63.6%) और फिलीपींस (34.7-51.9%) जैसे अन्य एशियाई देशों की तुलना में बहुत कम है।
दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि पिछले तीन साल में 35 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। टाटा मेमोरियल सेंटर के एक अध्ययन के अनुसार स्तन कैंसर हर 14 में से एक महिला को प्रभावित करता है और 2025 तक हर साल नए केस की संख्या बढ़कर 2.4 लाख प्रति वर्ष हो सकती है।
अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता दिल्ली के साथ-साथ पूरे भारत में कम है। इस वजह से कैंसर की बीमारी का जल्दी पता चलने में बाधा पहुंचती है और इसलिए प्रभावी उपचार नहीं मिल पाता है। दूसरा कोविड-19 ने कैंसर जांच में देरी की और लोगों के लिए इलाज कराना मुश्किल बना दिया।