दिल्ली सरकार ने 2022-2023 के बजट में परिवहन, सड़क और पुलों के लिए 9539 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है। परिवहन बेड़े में पहली बार 7000 से अधिक बसें दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और क्लस्टर बसें जोड़ी गई हैं। यह आंकड़ा अब तक का सर्वाधिक है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त बसों में पैनिक बटन, सीसीटीवी कैमरे, दिव्यांगों के लिए रैंप सहित महिलाओं की सुरक्षा के लिए बसों में मार्शल भी तैनात किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने महिलाओं को सशक्त करने के लिए निशुल्क यात्रा की सुविधा को आगे भी बढ़ाने की घोषणा की है।
इस मद में दिल्ली सरकार ने 250 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। महिलाओं को बसों में निशुल्क सफर की सुविधा से न केवल उन पर वित्तीय बोझ कम हुआ है, बल्कि नौकरी, पढ़ाई या किसी जरूरी काम के सिलसिले में आने-जाने में भी खुद को और अधिक आत्मनिर्भर होने का मौका मिला है।
बजट भाषण में वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार ने अक्तूबर 2019 से डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा शुरू की थी, जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा। पिछले साल डीटीसी और क्लस्टर बसों में तीन करोड़ से अधिक महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाया। इससे पहले के डेढ़ साल में भी डीटीसी-क्लस्टर बसों में पिंक टिकट से सफर करने वाली महिलाओं की संख्या करीब 21 करोड़ थी। इस योजना से महिला यात्रियों की संख्या बढ़ी है।
पहली बार बसों का बेड़ा पहुंचा 7000 पार
परिवहन विभाग के बेड़े में बसों की संख्या में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। पहली बार बसों का बेड़ा सात हजार को पार कर 7003 पर पहुंच गया है। दिल्ली के इतिहास में पहली बार बसों का बेड़ा सात हजार के पार हो गया। यह दिल्ली में सर्वाधिक है।
चेहरे की पहचान से बन रहे हैं लर्निंग लाइसेंस
परिवहन विभाग ने लर्निंग लाइसेंस बनवाने वालों की सहूलियत के लिहाज से भी अहम कदम उठाया है। अब लर्निंग लाइसेंस बनवाने वाले आवेदकों को परिवहन विभाग जाने की जरूरत नहीं है।
स्टार्टअप नीति को बढ़ावा देगा इंक्यूबेशन सेंटर
स्टार्टअप इको सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित करेगी। साथ ही, नवोन्मेषकों को उनके नए उद्यमों के लिए रुपये की जरूरत के लिए बैंकों और निवेशकों से जोड़ेगी। सरकार ने स्टार्टअप नीति के क्रियान्वयन के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली भारत की स्टार्टअप राजधानी है। देश में ज्यादातर स्टार्टअप यहीं पंजीकृत हुए हैं। दिल्ली के स्टार्टअप इको सिस्टम को और मजबूत करने के लिए सरकार ने दिल्ली की स्टार्टअप नीति को और अधिक प्रगतिशील बनाया है। सदन में मंत्री ने कहा कि हमारे देश में यदि कोई युवा स्टार्टअप स्थापित करना चाहता है तो उसे अपनी मूल नौकरी को छोड़कर अपना 90 फीसदी समय कराधान, प्रवर्तन, जीएसटी, एमसीडी व पेटेंट आदि की उलझनों से जूझना पड़ता है।
ऐसे में उद्यमियों के पास उनके स्टार्टअप आइडिया में काम करने के लिए 10 फीसदी समय बचता है। दिल्ली सरकार की नई स्टार्टअप नीति यह सुनिश्चित करेगी कि स्टार्टअप स्थापित करने वाले युवाओं का 100 फीसदी समय उनके विचार पर काम करने में लगे और दिल्ली सरकार उन औपचारिकताओं की जिम्मेदारी लेगी, जो 90 फीसदी के लिए मायने रखती हैं। इसके लिए इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के साथ निवेश के लिए सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सिसोदिया ने कहा कि तीन लाख से अधिक बच्चों ने 51 हजार व्यावसायिक विचारों पर काम किया है। यह छात्र पैसे कमा रहे हैं और दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं।
रोजगार बजट झूठ का पुलिंदा : आदेश गुप्ता
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा है कि केजरीवाल सरकार का बजट झूठ का पुलिंदा है। इसमें रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करने वाली केजरीवाल सरकार ने वर्ष 2015 में आठ लाख रोजगार देने की बात कही थी, फिर 10 लाख रोजगार देने की बात कही गई और अब रोजगार देने की संख्या 20 लाख हो गई है, लेकिन सच्चाई यह है कि अभी तक सिर्फ 440 रोजगार ही केजरीवाल सरकार दे पाई है। इस खुलासा केजरीवाल सरकार नेे ही एक आरटीआई में किया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने बजट में 3062 करोड़ रुपये सामाजिक पेंशन के लिए आवंटित करने की बात की है, जबकि दो वर्ष से दिल्लीवालों को सामाजिक पेंशन नहीं मिल रही और आवंटित राशि से लगभग दोगुना राशि तो बकाया पेंशन की है।
महंगाई पर नियंत्रण का नहीं है प्रावधान : अनिल चौधरी
दिल्ली कांग्रेस ने कहा कि केजरीवाल सरकार का वर्ष 2022-23 का बजट रोजगार बजट नहीं, बल्कि युवा बेरोजगारों के जले पर नमक छिड़कने वाला बजट है। इसमें कमजोर वर्ग के उत्थान, महंगाई पर नियंत्रण के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। दिल्ली में 15 लाख, 34 हजार, 832 युवा बेरोजगार हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि बेरोजगारी भत्ता देने के लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं किए जाने से 20 लाख रोजगार की घोषणा भी खोखली हो गई हैं। रोजगार के लिए सिर्फ 800 करोड़ के आवंटन का प्रस्ताव खुद संदेह के घेरे में है कि यह केवल अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के कल्याण के लिए है या रोजगार सृजन के लिए भी राशि रखी है। अनिल कुमार ने केजरीवाल सरकार से मांग की है कि न्याय योजना के तहत 7000 रुपये प्रतिमाह का भत्ता और महिलाओं को पंजाब में की गई घोषणा की तर्ज पर दिल्ली में भी 1000 रुपये प्रतिमाह का अंतरिम राहत भत्ता दें।