दिल्ली सरकार ने बजट में सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ढेरों कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का प्रस्ताव किया है। अनाथ बच्चों की पढ़ाई व जरूरतमंदों की पेंशन पर 3063 करोड़, पिछड़े वर्ग के बच्चों की कोचिंग पर 160 करोड़ रुपये और महिला एवं बाल विकास पर 4853 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव सदन में रखा गया।
बजट भाषण में वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि कोविड-19 के कारण जिन व्यक्तियों की मृत्यु हो गई, ऐसे 27,322 परिवारों को दिल्ली सरकार ने पचास-पचास हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई। ऐसे परिवार, जिन्होंने अपना कमाऊ सदस्य खो दिया, दिल्ली सरकार उनके आश्रितों को ढाई हजार रुपया प्रति माह पेंशन दे रही है।
कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च दिल्ली सरकार उठा रही है और ऐसे बच्चों को ढाई हजार रुपये प्रति माह आर्थिक सहायता दे रही है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, दिव्यांगों और सुविधा वंचित जैसे करीब 8.50 लाख लोगों को प्रतिमाह दो से ढाई हजार रुपये पेंशन दे रही है। इन परियोजनाओं पर वर्ष 2022-23 के बजट में 3063 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है।
उधर, एससी, एसटी और गरीब परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क डॉक्टर, इंजीनियर, वकालत की कोचिंग देने के लिए चल रही जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में दिल्ली सरकार ने 160 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
सर्वाधिक न्यूनतम वेतन दिल्ली में मिलता रहेगा
सरकार समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, अनुसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण, खाद्य और नागरिक आपूर्ति के लिए 4843 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सर्वाधिक न्यूनतम वेतन दिल्ली में मिलता रहेगा।
उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने दावा किया कि दिल्ली में श्रमिकों को बाकी राज्यों की अपेक्षा सर्वाधिक न्यूनतम वेतन 2015 से मिल रहा है। इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। कोविड महामारी के दौरान बाजार बंद होने की स्थिति में पांच लाख से ज्यादा निर्माण श्रमिकों के खाते में सहायता राशि दी। इस पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए।
फ्री मिलती रहेगा बिजली-पानी
दिल्ली सरकार ने बजट में प्रावधान किया है कि अगले वित्तीय में भी बिजली-पानी मुफ्त मिलेगा। वहीं, दिल्ली आरोग्य कोष के तहत निजी अस्पतालों में उपचार की सुविधा भी जारी रहेगी। वहीं, 20 लीटर पानी हर माह प्रति उपभोक्ता को मुफ्त उपलब्ध कराने की वर्ष 2015 में शुरू की गई योजना भी इस साल जारी रखने का निर्णय लिया गया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि इस योजना का करीब साढ़े छह लाख उपभोक्ताओं प्रतिमाह लाभ मिल रहा है।
वहीं, 200 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं और वर्ष 1984 के दंगा पीड़ितों को 400 यूनिट तक बिजली की खपत के लिए 100 प्रतिशत सब्सिडी अगले वर्ष भी जारी रखेगी। इस योजना के तहत न्यायालय परिसर के भीतर वकीलों के कक्षों को भी बिजली सब्सिडी में लाया गया है। सरकार ने 3250 करोड़ रुपये इसके लिए आवंटित किए हैं। इसके अलावा सभी कृषि उपभोक्ताओं को भी कनेक्शन के लिए सब्सिडी मिलेगी। अगले वर्ष के बजट में बिजली सब्सिडी के लिए 3,250 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है।
डोर स्टेप डिलीवरी में जुड़ेंगी 300 सेवाएं
दिल्ली सरकार के दफ्तरों में कामकाज को पारदर्शी बनाने की दिशा में की गई पहल के तहत सरकारी सेवाओं को डोर स्टेप डिलीवरी से जोड़ा गया। इसके तहत करीब 100 तरह की सेवाओं का 4.1 लाख लोगों को लाभ मिला है। इससे न तो लोगों को दफ्तरों में चक्कर लगाने की जरूरत है और न ही इंतजार करना पड़ता है। इससे रिश्वतखोरी पर भी पूरी तरह शिकंजा कसा है।