लक्ष्मी नगर निवासी सरला शर्मा और उनकी बेटी
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मुझे अभी तक बस इतना ही समझ आया है कि कोरोना बीमारी होने के बाद टेंशन को जितना हो सके उतना खुद से दूर रखें। इसकी वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ता-घटता है और फिर दिक्कतें होती हैं। संक्रमित होने के बाद मुझे भी औरों की तरह बुखार था। पैरासिटामॉल के साथ दूसरे उपाय करके मैं अपना और बेटी का घर पर ही ख्याल रख रही थी लेकिन बुखार जाने के बाद कमजोरी बहुत आती है।
मैंने महसूस किया कि कमजोरी के दौरान आपका दिल सोने का करेगा, बेड पर लेटे रहने का भी मन होगा। कुल मिलाकर जैसा आपका मन कर रहा है आपको वही करना चाहिए। थोड़ा बहुत ताकत दिखाने के चक्कर में यह बिगड़ सकता है। पूरा आराम करना जरूरी है। हां, एक चीज है कि संक्रमित होने के बाद सबसे ज्यादा ध्यान आपको सांस फूलने पर रखना होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपके दिमाग में कोई तनाव होने लगे। बल्कि एक बचाव के लिए यह जरूरी है। जब तक सांस लेने में दिक्कत नहीं हो रही हो तब तक मुझे नहीं लगता कि आपको अस्पताल में जाने की आवश्यकता है।
अगर दिक्कत है तो तत्काल मदद भी लेनी चाहिए। मैं और मेरी बेटी खुशी शर्मा दो सप्ताह पहले संक्रमित हुए थे। शुरूआत में मुझे काफी घबराहट हुई लेकिन जब मैंने अपने डॉक्टर को कॉल किया तो उन्होंने काफी अच्छे तरीके से मुझे समझाया। रात को हल्दी दूध का सेवन इसलिए किया क्योंकि दवाएं काफी गरम थीं। विटामिन सी और विटामिन ई की गोलियों का सेवन किया। कफ आने की वजह से मुझे एंटीबॉयोटिक्स दी गई थीं जिनका मैंने पांच दिन तक सेवन किया।
नाक बंद होने की वजह से मैंने अणु तेल का इस्तेमाल किया और इसका फायदा दो दिन बाद ही मुझे होने लगा। मैं बस यही अपील करती हूं कि कोरोना की इस महामारी में पैनिक होने की जरूरत नहीं है। पैनिक होने से अधिक आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है। डॉक्टर से बगैर पूछे कोई भी कदम न उठाएं।
(जैसा कि लक्ष्मी नगर निवासी सरला शर्मा ने परीक्षित निर्भय को बताया)