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हैड कांस्टेबल पर पिस्टल तानने वाले शाहरुख पठान को जमानत नहीं

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के दौरान हैड कांस्टेबल पर पिस्टल तानने वाले आरोपी शाहरुख पठान उर्फ खान को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने वीडियो क्लिपिंग और दंगों की तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि यह तथ्य इस अदालत की अंतरात्मा को झकझोरने के लिए काफी है कि कैसे आरोपी कानून व्यवस्था को अपने हाथों में ले सकता है।
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आरोपी को जाफराबाद इलाके में गोलीबारी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने सात पृष्ठों के फैसले में पठान द्वारा याचिका में भारत सरकार व मंत्रियों और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के विरुद्ध अत्यधिक अपमानजनक और गंभीर आरोप लगाने को भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा ऐसे तथ्य दिए गए हैं जो खुलासा करने लायक नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि याची पठान पर विभिन्न समुदायों के लोगों के बीच जाफराबाद मेट्रो स्टेशन और मौजपुर चौक के बीच सड़क पर 24 फरवरी 2020 को हुए दंगों की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में शामिल होने का आरोप है। उसने अनधिकृत रूप से इकट्ठा होकर पथराव किया था, पेट्रोल बम और बंदूक/पिस्तौल से गोलियां चलाई थीं। आरोपी की भूमिका दंगाइयों की भीड़ में भाग लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि भीड़ का नेतृत्व कर हाथ में एक पिस्तौल पकड़ कर खुलेआम फायरिंग की।
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उन्होंने कहा कि अदालत के समक्ष पेश वीडियो क्लिपिंग और तस्वीरों ने इस अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है कि कैसे आरोपी कानून व्यवस्था को अपने हाथों में ले सकता है। अदालत ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसका इरादा किसी की हत्या का नहीं था। उन्होंने कहा चाहे या नहीं आरोपी का इरादा शिकायतकर्ता कांस्टेबल या आम लोगों में मौजूद किसी भी व्यक्ति को पिस्तौल से मारने का था, लेकिन यह विश्वास करना मुश्किल है कि उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसका कृत्य घटनास्थल पर मौजूद किसी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
हाईकोर्ट ने पठान को जमानत न देने संबंधी ट्रायल कोर्ट के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि निचली अदालत ने सही माना है कि याची पर दंगों में भाग लेने का आरोप है और तथ्य दंगों में उसकी संलिप्तता दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी द्वारा किए गए अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है।
इससे पहले अभियोजन पक्ष ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आरोपी ने दंगाइयों का नेतृत्व ही नहीं किया बल्कि कानून व्यवस्था में लगे हैड कांस्टेबल पर पिस्टल से फायरिंग कर हत्या का प्रयास किया। आरोपी ने माना है कि उसने मेरठ से 35 हजार रुपये में पिस्टल खरीदी थी। आरोपी के घर से पिस्टल व कारतूस बरामद किए गए। आरोप की गंभीरता को देखते हुए जमानत न दी जाए।
वहीं आरोपी ने स्वयं को निर्दोष व ट्रायल में देरी को आधार बनाते हुए जमानत मांगी थी। आरोपी घटना के बाद फरार हो गया था। पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर 3 मार्च 2020 को यूपी के शामली बस स्टैंड से उसे गिरफ्तार किया था। आरोपी तभी से जेल में है।
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