सप्ताहांत कर्फ्यू के दौरान रविवार को सड़कों पर केवल वाहन ही चलते दिखे। मौसम के मिजाज को देखते हुए सड़कों के किनारे दोनों तरफ पक्षी जरूर मंडराते हुए नजर आए। बस स्टॉप पर कुछ यात्री जरूर थे, मगर बगैर पास या पहचान पत्र, बसों में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इक्का दुक्का लोग अगर पैदल चल भी रहे थे तो या तो जरूरी सेवा या किसी काम के सिलसिले में निकले। रास्ते में लगे बैरिकेड्स से किसी भी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने वजह का पता चलने के बाद आगे बढ़ने की इजाजत दी जा रही थी।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर देश के अलग अलग हिस्से के लिए ट्रेनों में सफर के लिए आने जाने वालों सहित वहां मौजूद ऑटो, रिक्शा और ई रिक्शा चालकों और दुकानों पर भी कुछ लोग बगैर मास्क के दिखे। मौके पर पुलिस की मौजूदगी भी थी मगर यात्रियों की अधिक संख्या होने से कुछ लोग बचकर निकल गए। कर्फ्यू के दौरान हर तरफ नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा था, मगर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों पर नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती से संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद मिल सकती है। रविवार को अमर उजाला संवाददाता ने द्वारका सेक्टर-दो से बस रूट संख्या-781 में सवार होकर कर्फ्यू के दौरान बाहर के हालात को देखा। पेश है इसकी है
सर्वेश कुमार की रिपोर्ट:
23 किलोमीटर तक एक यात्री के साथ दौड़ी बस
करीब 23 किलोमीटर के सफर में महज एक यात्री के साथ ही बस आगे बढ़ती रही। रास्ते में दो स्टॉप पर एक एक व्यक्ति दिखा, मगर उन्हें दूसरी बस के पहुंचने का इंतजार था। बस में प्रवेश करने से पहले कंडक्टर ने पहचान पत्र दिखाने को कहा, फिर बैठने को कहा। इसके बाद मंगला पुरी, दिल्ली कैंट, एयरपोर्ट, वसंत गांव, आरके पुरम से होती हुई रिंग रोड को पार कर, मोती बाग, चाणक्यपुरी, उद्योग भवन, संसद मार्ग, जंतर मंतर, कनॉट प्लेस से होकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अजमेरी गेट की तरफ रुकी।
जांच के बाद भी बैरिकेड्स से आगे बढ़ने दिया वाहनों को
मोती बाग और एंबेसी एरिया, कनॉट प्लेस सहित रास्ते में चार पुलिस बैरिकेड्स मिले, जहां एक एक वाहन चालक से बाहर निकलने की वजह, ई पास और पहचान पत्र देखने के बाद ही आगे बढ़ने की इजाजत दी गई। बस में कम यात्री होने की वजह से सुरक्षा कर्मियों ने बाहर से पूछकर बस को आगे जाने दिया। कर्फ्यू के दौरान लोगों को घरों से बाहर न निकलने की वजह से सड़कें वीरान दिखीं। रास्ते में जगह जगह बैरिकेड्स लगाए गए थे ताकि कोई भी बेवजह बाहर निकलने वालों को वापस भेजा जा सके। कोरोना के नए वैरिएंट के बढ़ते प्रसार को देखते हुए नियमों का पालन न करने वालों पर पुलिस की पैनी निगाहें थी।
कुछ लोगों ने नहीं लगाए थे ठीक तरह से मास्क
सप्ताहांत कर्फ्यू में जिस तरह की सख्ती पूरी दिल्ली में बरती गई, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर अजमेरी गेट पर कई दुकानदार, ऑटो चालक सहित कुछ यात्रियों ने मास्क ठीक से नहीं लगाए थे, जबकि कुछ वाहन चालकों ने मास्क हटाए हुए थे। हालांकि जैसे ही वहां एक पुलिस कर्मी पहुंचा, सभी ने मास्क लगा लिए। भीड़भाड़ को कम करने के लिए सड़कों से दुकानदारों को हटाया जा रहा था। दो चार यात्रियों के सवार होते ही बस गंतव्य के लिए रवाना होने लगी। बस अड्डों पर भी रविवार को वीरानी का माहौल रहा।
पार्क में सैर करते दिखे, बंदिशों से बेफिक्र पक्षियां भी धूमती रहीं
मौसम के मिजाज को देखते हुए कुछ लोग पार्कों में सैर करते भी नजर आए। नेहरु पार्क में चार बजे छह से सात लोग सैर करते नजर आए तो फुटपाथ पर भी कुछ लोग घूमते हुए नजर आए। हालांकि सभी ने मास्क लगाए हुए थे और सामाजिक दूरी का पालन भी कर रहे थे। बढ़ते संक्रमण के बीच लोग सेहत के लिए फिक्रमंद दिखे, इसलिए एहतियातों के बीच हरियाली के बीच कुछ देर बिताए। इस मौसम में हर तरफ चिड़ियों के चहचहाने की आवाजें सुनाई दे रही थी तो माहौल शांत होने की वजह से कई जगहों पर कबूतरों का भी दिखा। इक्का दुक्का मोर भी दिखे, जिन्हें शायद महसूस हो गया था बंदिशें उनके लिए नहीं है।
मेट्रो में भी नियमों का सख्ती से पालन
येलो और ब्लू लाइन पर दो मेट्रो के बीच 15 मिनट का अंतराल होने की वजह से मेट्रो में भीड़ सामान्य रही। सभी यात्री नियमों का पालन करते हुए मेट्रो में सफर करते नजर आए। नई दिल्ली स्टेशन से सामान के साथ कुछ लोग ट्रेनों से सफर के बाद लौटने के बाद गंतव्य तक पहुंचने के लिए मेट्रो को अपनाया। नई दिल्ली स्टेशन पर मेट्रो में प्रवेश के लिए एक रास्ता खुला था। इसके चारों तरफ बैरिकेड्स लगा दिए गए थे ताकि भीड़भाड़ न हो। थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन के बाद स्कैनिंग से गुजरने के बाद यात्रियों को मेट्रो में सफर करने की इजाजत दी गई।
ऑटो चालकों की बढ़ी चिंता
सर्दी और बारिश के साथ साथ आवागमन के लिए बस, मेट्रो और टैक्सी की सुविधा होने की वजह से ऑटो चालकों की कमाई दो दिनों के दौरान प्रभावित हुई। ऑटो चालक गोपी ने बताया कि रोजाना किराये के मद में 300 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। शाम पांच बजे तक उसकी कमाई महज 70 रुपये हुई थी। दूसरे ऑटो चालक सुशील ने कहा कि बसें खाली चल रही हैं जबकि जिन्हें ठंड से बचाव की चिंता है ऑटो के बजाय टैक्सी में सफर करते हैं। अधिकतर यात्री बस, मेट्रो या टैक्सी में सफर कर रहे हैं। दो दिनों में उनकी कमाई एक दिन के किराये के बराबर भी नहीं रह गई। अगर लंबे समय तक सप्ताहांत कर्फ्यू का सामना करना पड़ा तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
कॉलोनियों में खुली रहीं कुछ दुकानें
पालम के मंगलापुरी से जब बस गुजर रही थी, सड़कों के दोनों किनारे कुछ लोग इधर उधर घूमते नजर आए। यहां जरूरी उत्पादों की बिक्री के लिए कुछ दुकानें भी खुली थी, मगर यात्रियों की भीड़ इकट्ठा नहीं होने दी जा रही थी। कॉलोनियों के अंदर जरूरी सामान और दवाईयों की दुकानें खुली रहीं। मगर, वहां भी बगैर मास्क पहुंचने वालों को दुकानदार मना कर रहे थे। भीड़ इकट्ठा न हो इसलिए लोगों से कहा जा रहा था ताकि संक्रमण का और प्रसार न हो।