संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा को तीन महीने बचे हैं। परीक्षा की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर व कटवारिया सराय में प्रतियोगियों का तनाव बढ़ता जा रहा है। नतीजतन, कमरे की दीवारें शब्दों से भरने लगी है।
कोई कोना इतिहास बयां कर रहा है तो कोई विज्ञान का फॉर्मूला। दुनिया का मानचित्र भी दीवारों की शोभा बढ़ा रहा है। तीसरी बार प्रारंभिक परीक्षा देने की तैयारी कर रहे संयम ने इससे जुड़े सवाल पर बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, बार-बार एक चीज पढ़ी नहीं जा सकती और सब-कुछ एक बार में याद भी नहीं होता। तो जो बहुत जरूरी है, उसे दीवार पर टांग देते हैं, जिससे दिन में एक बार नजर पड़ जाए और दो-चार दिन में दिमाग में बैठ जाए। इसके बाद उसकी जगह आंकड़ों से भरा दूसरा पेपर चिपक जाता है। अगले तीन महीने तक ऐसे ही चलता रहेगा।
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) जून में होनी है। दिल्ली के तीन बड़े कोचिंग हब में इस वक्त इसी की चर्चा आम है। कमरे की दीवारें देश-दुनिया के नक्शे और नोट्स से छिपती जा रही हैं। निराशा से बचने के लिए महापुरुषों की तस्वीरें और उनके सूक्त वाक्य भी इनके बीच जगह बना रहे हैं।
परीक्षा की तिथि करीब तो कम हो जाते हैं पढ़ाई के घंटे
अभ्यर्थियों का कहना है कि जैसे-जैसे परीक्षा की तिथि करीब आती है, वैसे -वैसे पढ़ाई को लेकर समय कम कर दिया जाता है। इसका कारण है कि शरीर के साथ-साथ दिमाग को आराम।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, परीक्षा के नजदीक आते ही दिमाग को जितना आराम मिलेगा उतना बेहतर तरीके से परीक्षा में प्रदर्शन होगा। वहीं, अंतिम समय में नई किताब के बजाय पुरानी किताबों और नोट्स को ही बार-बार दोहराने पर जोर दिया जा रहा है।
खाना, सोना और पढ़ना है कमरे की कहानी
परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि कोचिंग में पाठ्यक्रम पूरा होने पर अब अधिकांश छात्रों का जोर रिविजन पर है। पुराने छात्र पहले के मुकाबले लाइब्रेरी में अब अधिक समय बिता रहे हैं। तैयारी को लेकर इतना दबाव है कि एक कमरे की कहानी देर रात पढ़ने और सोने और खाने के ईर्द-गिर्द है। इससे पहले अभ्यर्थियों के यह कमरे छिटपुट पार्टियों के गवाह भी रहे हैं।
सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में दो माह का समय रह गया है। इस बार प्रयास है कि सिविल सेवा को पास कर अधिकारी बनने का सपना पूरा हो जाए। पहले भी परीक्षा दी है, लेकिन थोड़े फासले से रह गया। इस बार कोशिश है कि परीक्षा के तीनों चरणों में बेहतर कर सकूं।
- संयम राज, बिहार, सिविल सेवा अभ्यर्थी
परीक्षा नजदीक आते ही लाइब्रेरी में ही पढ़कर अधिक समय बिता रहा हूं। घर पर सोने और खाने के लिए जाता हूं। इस बार कोशिश है कि परीक्षा पास कर ही घर लौटूंगा। मेरे माता-पिता को भी मेरी सफलता का इंतजार है।
-प्रशांत शुक्ला, अमेठी, यूपी, सिविल सेवा अभ्यर्थी