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विजेंद्र गुप्ता पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित

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विजेंद्र गुप्ता पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित
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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई। केंद्र की तरफ से संविधान की धारा 370 खत्म करने के मामले में बहस व धन्यवाद प्रस्ताव लाने की मांग पर अड़े विपक्ष ने बेल में आकर हंगामा किया। इससे नाराज विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने पहले भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा को मार्शलों से बाहर निकलवा दिया।
इसके बाद भी हंगामा जारी रहा। इससे नाराज अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया। निलंबन की कार्रवाई विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश न मानने व सदन की कार्यवाही में बाधा डालने पर की गई। उधर, इस कार्रवाई से नाराज भाजपा के बचे दो विधायकों ने वॉक आउट किया। इसके बाद चारों विधायक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर पहुंचे और लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाते हुए देर शाम तक धरना दिया।
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इससे पहले शुक्रवार दोपहर दो बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने केंद्र सरकार की तरफ से धारा 370 हटाने को लेकर बहस करने व धन्यवाद प्रस्ताव लाने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की मांग को मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद विपक्ष के सदस्य बेल में आ गए। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा को मार्शलों से बाहर निकालने को कहा। सिरसा को बाहर करने के बाद भी हंगामा नहीं थमा। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ने लगातार विपक्ष को शांत होने का आदेश दिया। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। लगातार दी रही चेतावनी को अनसुना करने पर विधानसभा अध्यक्ष ने करीब ढाई बजे नेता प्रतिपक्ष को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने का आदेश दिया।
कार्यवाही से निलंबित किए जाने के बाद विपक्षी नेता मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि हम अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव लाना चाहते थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने ऐसा नहीं करने दिया। मुझे पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया और सिरसा को मार्शल आउट कर दिया गया। विजेंद्र गुप्ता ने लोकतंत्र का गला घोटने का भी आरोप लगाया।
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मनीष सिसोदिया ने हंगामे को बताया निंदनीय
सदन में बोलते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अब धारा 370 बीते समय की बात हो गई है। मुख्यमंत्री ने पहले ही इसका समर्थन कर दिया था। विपक्ष बहस कराने की जगह सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश कर रहा था। उसकी यह कार्रवाई निंदनीय है।
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