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ओमिक्रॉन की बूस्टर डोज के नाम पर ठगते थे, आगरा से 3 गिरफ्तार

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नई दिल्ली। कोविड के ओमिक्रॉन वैरिएंट की बूस्टर डोज लगवाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले गैंग का स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशन (आईएफएसओ) यूनिट ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में तीन आरोपियों को शनिवार को आगरा से गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान हरियाणा के पलवल निवासी गैंग सरगना मनीष कुमार, साथी आगरा के अर्जुन नगर के नवीन कुंज निवासी रोहित सिंह और आगरा के ताजगंज निवासी कौशलेंद्र सिंह तोमर के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल और चार डेबिट कार्ड बरामद किए हैं, साथ ही आठ बैंक अकाउंट का भी पता चला है। आरोपी खुद को सरकारी अधिकारी बताते थे।
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आरोपी पीड़ितों के व्हाट्सएप को हैक करने के बाद उनकी संपर्क सूची के लोगों को मैसेज भेजकर इमरजेंसी हो जाने की बात कर रुपये मांगते थे। चूंकि रुपये पीड़ित के ही व्हाट्सएप नंबर से मांगे जाते थे, तो ऐसे में जानकार लोग तुरंत बताए गए खातों में रुपये ट्रांसफर कर देते थे। शुरुआती जांच के बाद पता चला है कि आरोपियों ने देशभर के सैकड़ों लोगों से ठगी की है। फिलहाल 24 शिकायतकर्ताओं का पता चला है।
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि पिछले दिनों करोल बाग निवासी एक शख्स ने ठगी की शिकायत यूनिट से की थी। पीड़ित ने बताया कि पिछले दिनों उसके मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को सरकारी डॉक्टर बताकर कोविड के ओमिक्रॉन वैरिएंट की बूस्तर डोज के बारे में पूछताछ की। पीड़ित ने दोनों डोज लगने की बात की तो आरोपी ने बताया कि बूस्टर डोज के लिए उनका नंबर आ गया है। आपके नंबर पर एक अन्य नंबर से कॉल आएगी। उस कॉल को कांफ्रेंस कॉल में लेकर एक नंबर बताना होगा। इसके बाद आपके नजदीकी सेंटर पर बूस्टर डोज लगाने की तारीख दे दी जाएगी। पीड़ित आरोपी के झांसे में आ गया। कॉल के दौरान ही दूसरे नंबर से कॉल आई, जिसके बाद उसे कांफ्रेंस पर लेकर गूगल से आए कोड को पीड़ित ने आरोपियों से साझा कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने उसके व्हाट्सएप को हैक कर लिया। पीड़ित के दोस्तों, रिश्तेदारों व अन्य लोगों को उसके ही व्हाट्सएप से मैसेज कर मेडिकल इमरजेंसी बताकर रुपयों की मांग की। खुद पीड़ित के भाई ने बताए गए खाते में 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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टेक्निकल सर्विलांस से जांच की
फौरन एसीपी रमन लांबा, इंस्पेक्टर मनोज कुमार व एसआई अजीत व अन्य की टीम ने जांच शुरू की। टेक्निकल सर्विलांस के अलावा जिन खातों में रुपये ट्रांसफर हुए उनकी जांच की गई। पता चला कि कॉलर आगरा में मौजूद है। पुलिस ने उसकी पहचान मनीष कुमार के रूप में की। एक टीम को फौरन आगरा भेजा दिया गया। वहां से पहले मनीष कुमार को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उसके दो साथियों रोहित व कौशलेंद्र सिंह तोमर को भी पकड़ लिया।
यू-ट्यूब से व्हाट्सएप हैक करना सीखा
गैंग सरगना मनीष कुमार ने बताया कि एक साल पहले उसने यू-ट्यूब से व्हाट्सएप हैक करना सीखा था। वह अलग-अलग तरह से ठगी करता था। फिलहाल कोविड के नाम पर आसानी से लोगों को ठगा जा सकता था, इसलिए लोगों को बूस्टर डोज दिलाने के नाम पर ठगता था।
कौन हैं पकड़े गए आरोपी
जांच के दौरान पता चला है कि कौशलेंद्र बीकॉम करने के बाद आगरा से ही एमबीए कर रहा है। रोहित सिंह ने बीए कर रखी है। गैंग सरगना मनीष कुमार महज 12वीं कक्षा पास है। जल्द रुपये कमाने के लिए मनीष ने ठगी का धंधा शुरू किया था।
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