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Ukraine vs Russia: भारतीय छात्रों को ढाल बना रही यूक्रेन की सेना, सबके बाद दे रही निकलने की मंजूरी

Fri, 04 Mar 2022 10:37 AM IST
अनुराग सक्सेना शुभम बंसल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के द्वारका की तृषा कीव में मेडिकल द्वितीय वर्ष की छात्रा है। 26 फरवरी को उसने हॉस्टल छोड़ा था। 28 फरवरी की रात में बॉर्डर पहुंचना हुआ, लेकिन 500 मीटर दूर रोमनिया में प्रवेश करने में तीन दिन लग गए।
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अपनों से मिलने की खुशी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूक्रेन की सेना खारकीव और कीव में फंसे भारतीय छात्रों का इस्तेमाल अपने बचाव में कर रही है। उनकी कोशिश ज्यादा वक्त तक छात्रों को अपनी सीमा में रखने की है। सबसे पहले यूक्रेन समेत दूसरे यूरोपीय देशों, मिस्र व नाइजीरिया तक के लोगों को दूसरी तरफ भेजा रहा है।

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सबसे आखिर में नंबर भारतीय छात्रों का आता है। इसी वजह से बॉर्डर पर पहुंचने के बाद भी उन्हें पोलैंड, हंगरी और रोमानिया की सीमा में दाखिल होने में 24-36 घंटे के बीच का समय लग रहा है। गुरुवार को खारकीव और कीव से आईजीआई एयरपोर्ट पर पहुंचे भारतीय छात्रों ने यह दास्तां बयां की।

दिल्ली के द्वारका की तृषा कीव में मेडिकल द्वितीय वर्ष की छात्रा है। 26 फरवरी को उसने हॉस्टल छोड़ा था। 28 फरवरी की रात में बॉर्डर पहुंचना हुआ, लेकिन 500 मीटर दूर रोमनिया में प्रवेश करने में तीन दिन लग गए। तृषा ने बताया कि बॉर्डर पर यूक्रेन की पुलिस भारतीय छात्रों को देखते ही आगे बढ़ने से मना कर देती थी। सबसे पहले यूक्रेन के लोगों को पास मिलता। उसके बाद दूसरे यूरोपीय व अफ्रीकी देशों के नागरिकों को।
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बॉर्डर का गेट भी हर दो घंटे बाद एक घंटे के लिए खोला जाता था। इसमें भी आधा घंटे का वक्त मालवाहक गाड़ियों के लिए था। बचे आधे घंटे में यूक्रेन और अफ्रीका के लोग पहले पार होते। बाद के पांच-सात मिनट में भारतीयों को मौका मिलता। इस दौरान दो-तीन बच्चे ही बॉर्डर पर कर पाते।

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फरीदाबाद की ज्योति डागर मेडिकल आखिरी वर्ष की छात्रा हैं। ज्योति के मुताबिक, यूक्रेन पुलिस मान रही है कि अगर भारतीय छात्र बॉर्डर पर मौजूद रहे तो रूसी सेना आक्रमण नहीं करेगी। उसे रोमानिया की सीमा में घुसने में चार दिन लग गए। बहादुरगढ़ की सोनिया ने बताया कि कीव से पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचना आसान नहीं रहा। बॉर्डर पार करने में दो दिन का समय लग गया। सोनिया ने भी बताया कि यूक्रेन पुलिस की कोशिश भारतीयों को बॉर्डर पर रोके रखने की है, जबकि दूसरे देशों के लोगों को जल्द निकाल दिया जा रहा है।

बॉर्डर पर देखा जा रहा है नस्ल और रंग

खरकीव से आईजीआई पहुंचे जालंधर के गौरव ने बताया कि पोलैंड बॉर्डर पर ज्यादातर भारतीयों के साथ भेदभाव हुआ। नस्ल और रंग देखकर बॉर्डर पार करने की इजाजत मिल रही है। इसमें भारतीय छात्रों को पीछे धकेला जा रहा है। इसी वजह से यूक्रेन से निकलने में देरी हो रही है।

यूक्रेन बॉर्डर जाएगा गुरुद्वारा कमेटी का प्रतिनिधिमंडल

यूक्रेन में फंसे लोगों की मदद के लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने प्रतिनिधिमंडल को भेजने का निर्णय लिया है। इसमें 20 लोगों को शामिल किया गया है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल 10 लोग पोलैंड बॉर्डर जाएंगे और बाकी 10 स्लोवाकिया में लोगों की मदद करने पहुंचेंगे। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने बताया कि 20 लोगों की टीम होगी। इसमें कमेटी के वरिष्ठ सदस्य, स्टाफ के अलावा वॉलंटियर्स मौजूद रहेंगे।

यूक्रेन बॉर्डर पर फंसे लोगों को लंगर व स्वास्थ्य सुविधाओं सहित हरसंभव मदद पहुंचाई जाएगी। कालका ने कहा कि जंग के बाद हालात और भी बदतर हो जाते हैं। इस स्थिति में लोगों को मदद की अधिक जरूरत पड़ती है। इसलिए कमेटी ने मानवता के प्रति अपना फर्ज समझते हुए यह निर्णय लिया है। कमेटी के महासचिव जगदीप सिंह काहलो ने बताया कि दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पहले भी इसी प्रकार देश में आपदा के समय उत्तराखंड, गुजरात, कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पंजाब से लेकर नेपाल में मदद की है।

पिता ने एयरपोर्ट पर बांटी मिठाई

यूक्रेन के टर्णोपिल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे पलवल के हथीन के सचिन गोयल के पिता ने बेटे के सुरक्षित भारत पहुंचने की खुशी में एयरपोर्ट पर मिठाई बांटी। पिता संजय कुमार गोयल ने कहा कि यूक्रेन सीमा को पार करना छात्रों के लिए टेढ़ी खीर थी। सचिन ने बताया कि पोलैंड बॉर्डर पर दो दिन का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान भारतीय छात्रों को भेदभाव का सामना करना पड़ा। देश के प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया करते हुए परिजनों ने यूक्रेन में फंसे छात्रों को जल्द से जल्द निकालने का आग्रह किया है। हालांकि छात्रों से बातचीत में यह बात सामने आ रही है कि बॉर्डर पार करने के बाद छात्रों को स्वदेश लौटने के लिए सभी इंतजाम किए गए हैं। बॉर्डर पार करने में उन्हें परेशानियां पेश आ रही हैं।

चार दिन में पार हुआ यूक्रेन का बॉर्डर

ग्वालियर के अरमान खान ने बताया कि 24 तारीख की सुबह चार बजे कीव में उनके हॉस्टल से 800 मीटर की दूरी पर एक तेज बम धमाका हुआ और पांच लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि अपने दोस्तों के साथ हम बंकर में छिप गए। दो दिन तक बंकर में रहे। 26 फरवरी को कैब से 12 किमी दूर रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां हम लोगों के पास इतने ही पैसे नहीं थे कि या तो हम खाना खा लेते या यात्रा करते। जान बचाने के लिए सफर पर निकल पड़े। धक्का-मुक्की के बीच किसी तरह ट्रेन में जगह मिल सकी। दो दिन बाद हंगरी बार्डर पर पहुंचना हुआ। बॉर्डर पार करने में चार दिन का समय लगा।
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