उन्होंने बताया कि अब तो छात्र बर्फ को पिघलाकर वही पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं, कड़ाके की ठंड के बीच अलाव व हीटर की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में खाने-पीने की सामग्रियों की किल्लत से लेकर ठंड तक का सामना करना पड़ा है। कुछ ऐसे ही खौफनाक अनुभव पटौदी के अंकित धनखड़ ने भी साझा किए।
रूस की सीमा पर खड़ी हैं 130 बसें
गुरुग्राम निवासी छात्रा आकांक्षा, अंजलि, रितु व राजस्थान की माहेश्वरी ने बताया कि स्थिति लगातार खराब हो रही है। सुबह से ही भारी बर्फबारी हो रही है जिसको बाल्टियों में जमा कर उसी को पिघलाकर पीने के पानी का इंतजाम किया जा रहा है। दूसरे हॉस्टलों में लाइट भी नहीं है तो हीटर नहीं चल रहा है और सब ठंड से ठिठुर रहे हैं। खाने-पीने का सामान भी खत्म है।
दूतावास ने दिया निकालने का आश्वासन
अंकित ने बताया कि अगर यूक्रेन व रूस की सरकार चाहें तो रूस की सीमा के जरिए निकाल सकते हैं। सूमी से रूस की सीमा सिर्फ 80-90 किलोमीटर दूर है। खास बात यह है कि भारतीय दूतावास ने छात्रों को आश्वासन भी दिया है कि रूस की सीमा के जरिए उनको निकाला जाएगा लेकिन ऐसा कब तक किया जाएगा यह नहीं बताया गया है। दूतावास ने छात्रों को कहा है कि जहां पर हैं वहीं बने रहें।