याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई छह माह में पूरी करने का आदेश 27 फरवरी 2019 को दिया था। इसके बाद भी सुनवाई अभी तक पूरी नहीं हुई है। याचिका में अधिवक्ता अमित कुमार ने कहा है कि सुनवाई की लंबी अवधि के कारण उनका मुवक्किल जमानत पाने का अधिकारी है।
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अविलंब सुनवाई उसका अधिकार है। मामले की सुनवाई न होने से उसके अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। वहीं मुकदमे की जल्द सुनवाई प्रत्येक आरोपी का मानवाधिकार है। ऐसा न होने से आरोपी का न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास कम होता है।
याचिका में ये भी कहा गया है कि कोरोना महामारी से पूरी दुनिया प्रभावित है। सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के आदेश पर कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। इस नजरिये से भी वह जमानत पाने का अधिकार है क्योंकि आरोप साबित हुए बिना आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। इसके बाद भी वह साढ़े 11 साल से जेल में है। कोरोना काल में उसे जेल में रखना अमानवीय होगा।
वहीं मामले में अभियोजन के अधिकतर गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। इस नजरिये से भी वह जमानत पाने का हकदार है। अदालत ने जिगिषा घोष हत्या मामले में बलजीत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि मामले में अन्य आरोपी रवि कपूर को फांसी की सजा सुनाई गई थी।