दिल्ली में 70 वर्षीय महिला ने घरेलू हिंसा कानून के तहत एक प्रावधान को चुनौती दी है। इस कानून के तहत बहु को साझा घर से निकालने पर रोक लगाई गई है। महिला ने तर्क रखा है कि उसकी बहु उसे परेशान करती है बावजूद इसके इस कानून के कारण उसे घर से नहीं निकाला जा सकता। हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग और बहू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रीति सिंह ने तर्क दिया कि अधिनियम का उद्देश्य घरेलू हिंसा से महिलाओं की रक्षा करना है। यह प्रावधान एक पीड़ित महिला के लिए एक बाधा के रूप में कार्य करता है जो किसी अन्य महिला के हाथों पीड़ित है और इसलिए यह असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है।
याचिका में कहा गया है कि पीडब्ल्यूडीवी अधिनियम, 2005 की धारा 19 (1) के प्रावधान के आलोक में कोई भी महिला घरेलू हिंसा और पीड़ित व्यक्ति पर किए गए अत्याचारों की परवाह किए बिना साझा घर से निकाले जाने के लिए उत्तरदायी नहीं है।कोई भी विषमलैंगिक महिला अपने साथी के खिलाफ उसे साझा घर से बेदखल करने के लिए याचिका दायर कर सकती है, लेकिन पीडब्ल्यूडीवी अधिनियम, 2005 की धारा 19 (1) के प्रावधान के आलोक में एक समलैंगिक महिला को ऐसा अधिकार नहीं दिया गया है।